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बहे असुवन की लंबी धार माई विसर्जन में लिरिक्स

बहे असुवन की लंबी धार माई विसर्जन में —यह भजन माँ दुर्गा के विसर्जन के भावुक क्षणों को दर्शाता है। जब भक्त माँ को विदा करते हैं, तो आँखों से अश्रु बह निकलते हैं, और मन भावुक हो उठता है। यह भजन माँ के प्रति हमारी अटूट श्रद्धा, प्रेम और भक्ति को व्यक्त करता है। माँ आती हैं तो आनंद की लहर उमड़ पड़ती है, और जब विदा होती हैं, तो हृदय भाव-विह्वल हो जाता है।

Bahe Asuvan Ki Lambi Dhaar Maai Visarjan Me

दोहा –
हम तेरे द्वार में ऐ मैया,
झोली फैलाए बैठे हैं,
हम तेरी आस में,
दुनिया भुलाए बैठे हैं।

लगी भगतन की भीड़ अपार,
माई विसर्जन में,
बहे असुवन की लंबी धार,
माई विसर्जन में।।

कैसे करूं माँ तेरा विसर्जन,
दुख में भीग रहा मेरा तन,
बहती है असुवन जल की धारा,
समझाये न समझे ये मन,
कांपे थर थर मेरा ये बदन,
माई विसर्जन में,
लगी भगतन की भीड़ अपार,
माई विसर्जन में।।

माँ तुमने क्यूँ मुखड़ा मोड़ा,
आज चली क्युं रिश्ता जोड़ा,
योगी दसम दिन है दुखदाई,
मां ने हमसे लेली विदाई,
कुछ तो मां बोलो कहो हे मां,
माई विसर्जन में,
लगी भगतन की भीड़ अपार,
माई विसर्जन में।।

मुरझाया सा मन का बगीचा,
माँ तुमने जिसको था सींचा,
अश्क बहाती दिल की गलियां,
सूख रही दिल की गलियां,
लड़खड़ाती है मेरी ज़ुबा,
माई विसर्जन में,
लगी भगतन की भीड़ अपार,
माई विसर्जन में।।

कैसी घड़ी आई दुखदाई,
लेके चली मां आज विदाई,
मुश्किल में है पल ये हमारे,
कैसे सहूंगा तेरी जुदाई,
रोते रोते ये कहता है मन,
माई विसर्जन में,
लगी भगतन की भीड़ अपार,
माई विसर्जन में।।

लगी भगतन की भीड़ अपार,
माई विसर्जन में,
बहें असुवन की लंबी धार,
माई विसर्जन में।।

गायक / प्रेषक – उदय लकी सोनी।

माँ दुर्गा का विसर्जन सिर्फ एक विदाई नहीं, बल्कि अगले वर्ष उनके पुनः आगमन की प्रतीक्षा का संदेश है। उनकी कृपा सदैव हमारे जीवन में बनी रहे और हर भक्त के मन में भक्ति का दीप जलता रहे। यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो “सुनो करुणा भरी ये पुकार द्वार तेरे हम आए” और “माँ के दर्शन से होता बेड़ा पार” जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य सुनें और माँ की महिमा का अनुभव करें। जय माता दी! ????????

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