“तुझे दे दी गुरुजी ने चाबी तो फिर कँगाल क्यों बने” भजन हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि जब गुरु कृपा हमारे जीवन में होती है, तब हमें किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होती। गुरु का दिया ज्ञान और आशीर्वाद ही वह चाबी है जो हमारे सारे दुखों और अभावों के ताले खोल देती है, फिर भी यदि हम दुखी हैं तो इसका कारण हमारी अपनी अनभिज्ञता है।
Tujhe De Di Guruji ne Chabi To Phir Kangal Kyo Bane
तुझे दे दी गुरुजी ने चाबी,
तो फिर कँगाल क्यो बने,
तुझे लाल चुनर,
तुझे लाल चुनरिया उड़ादी,
तो फिर बेहाल क्यो फिरे,
तुझें दे दी गुरूजी ने चाबी,
तो फिर कँगाल क्यो बने।।
लूटना चाहे लूटले प्यारे,
आज तू हीरे मोती,
ना जाने कल आए न आए,
जीवन मे फिर ये रात अनोखी,
जीवन मे फिर ये रात अनोखी,
प्रीत चरणो से गुरु के लगाई,
तो फिर कँगाल क्यो बने,
तुझें दे दी गुरूजी ने चाबी,
तो फिर कँगाल क्यो बने।।
न कोई रोके न कोई टोके,
न कोई लूटने वाला,
पीकर जाम नाम सतगुर का,
प्राणी तू हो जा मतवाला,
प्राणी तू हो जा मतवाला,
नाम भक्ती को तूने है पाई,
तो फिर कँगाल क्यो बने,
तुझें दे दी गुरूजी ने चाबी,
तो फिर कँगाल क्यो बने।।
दासन दास शरण प्रभू तेरी,
जाने न महिमा तेरी,
न जानूँ मै सेवा भक्ति,
गाऊँ क्या मै महिमा प्रभू तेरी,
गाऊँ क्या मै महिमा प्रभू तेरी,
आज मुझको भी थोड़ी पिलादे,
तो नाचूँ मै झूम झूमके,
तुझें दे दी गुरूजी ने चाबी,
तो फिर कँगाल क्यो बने।।
तुझे दे दी गुरुजी ने चाबी,
तो फिर कँगाल क्यो बने,
तुझे लाल चुनर,
तुझे लाल चुनरिया उड़ादी,
तो फिर बेहाल क्यो फिरे,
तुझें दे दी गुरूजी ने चाबी,
तो फिर कँगाल क्यो बने।।
गुरु की कृपा से हर समस्या का समाधान संभव है, बस हमें उनकी दी हुई राह पर चलना होगा। “तुझे दे दी गुरुजी ने चाबी तो फिर कँगाल क्यों बने” भजन हमें अपने भीतर गुरु भक्ति और विश्वास को और अधिक दृढ़ करने की प्रेरणा देता है। अन्य भक्तिमय गुरु भजनों को पढ़ें, जैसे “गुरुदेव मेरे दाता मुझको ऐसा वर दो”, “तेरे चरणों में सतगुरु मेरी प्रीत हो”, “गुरुदेव तुम्हारे चरणों में बैकुंठ का वास लगे मुझको” और “सारे तीरथ धाम आपके चरणों में गुरुदेव”।