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चुनरी ओढाऊ तनै लाख की राणीसती भजन लिरिक्स

चुनरी ओढाऊ तनै लाख की राणीसती भजन राणीसती माता की भक्ति, त्याग और शक्ति को समर्पित है। जब भक्त प्रेम और श्रद्धा से माँ का स्मरण करते हैं, तो उनका आशीर्वाद जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाता है। यह भजन उनकी गौरवशाली गाथा को याद कर भक्तों के मन में आस्था और भक्ति की लौ जलाता है।

Chunari Odhau Tanai Lakh Ki Ranisati Bhajan Lyrics

गर जोर मेरो चालै,
चुनरी ओढाऊ तनै लाख की,
के करा पर दादी कोन्या,
बात या मेरे हाथ की।।

रतन जड़ित सिंहासन बैठा,
महारानी सा लागों,
सारी दुनिया माही दादी,
थैं क्षत्राणी बाजो,
लाखों की चुनरी थारै पर,
मैया चोखी लाग सी,
गर जोर मेरो चालै,
चुनरी ओढाऊँ तनै लाख की।।

छत्र सोहे सोने का सिर पर,
गले नौलखा हार है,
हीरे की नथनी कुंडल को,
गजब हुयो श्रृंगार है,
कईयां लाऊ हल्की चुनर,
बोलो दादी आपकी,
गर जोर मेरो चालै,
चुनरी ओढाऊँ तनै लाख की।।

एक से बढ़कर एक भगत,
मां तेरे द्वारे आवै हैं,
चांद सितारों जड़ी चुनरी,
थांनै लाए उड़ावै हैं,
देखु जब खुद की चुनर नै,
आवै मन में लाज सी,
गर जोर मेरो चालै,
चुनरी ओढाऊँ तनै लाख की।।

थारो हाथ रहे जो सिर पर,
जल्दी वह दिन आवैगो,
भगत थाने लक्खा की मां,
चुनर लाय ओढावै लो,
सच्ची बोलूं तो मैया जी,
भूखी भक्ति भाव की,
गर जोर मेरो चालै,
चुनरी ओढाऊँ तनै लाख की।।

गर जोर मेरो चालै,
चुनरी ओढाऊ तनै लाख की,
के करा पर दादी कोन्या,
बात या मेरे हाथ की।।

Singer – Uma Sharma Chittoragh

राणीसती माँ की महिमा को शब्दों में बयां करना कठिन है, लेकिन भजन हमें उनकी भक्ति के करीब लाते हैं। अगर आपको यह भजन पसंद आया, तो “ओढ़ो जी ओढ़ो दादी म्हारी भी चुनरिया” और “दादी झुंझुनू बुलाए मेरा मन हर्षाये” जैसे अन्य भजन भी सुनें और माता की कृपा का अनुभव करें। जय राणीसती माँ! ????????

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