मेरे स्वरों को अपना स्वर दो गाऊँ मैं तेरी वाणी लिरिक्स

“मेरे स्वरों को अपना स्वर दो, गाऊँ मैं तेरी वाणी” भजन माँ सरस्वती की असीम कृपा और उनके दिव्य आशीर्वाद को समर्पित है। जब भक्त माँ वीणा वादिनी की स्तुति करता है, तो उसकी वाणी मधुर हो जाती है, बुद्धि प्रखर हो जाती है, और जीवन का हर कठिन मार्ग सहज हो जाता है। यह भजन माँ सरस्वती की आराधना करते हुए हमें प्रेरित करता है कि हम उनके आशीर्वाद से अपनी वाणी और ज्ञान को पवित्र करें, ताकि हम सच्चे अर्थों में शिक्षित और जागरूक बन सकें।

Mere svaro Ko Apna svar Do Gau Mai Teri vani

मेरे स्वरों को अपना स्वर दो,
गाऊँ मैं तेरी वाणी,
कंठ बसो महारानी,
कंठ बसो महारानी।।

सुर का ज्ञान नहीं,
लय का ज्ञान नहीं,
तेरी वंदना इन होठों से,
फिर भी मैं तो गाऊं,
फिर भी मैं तो गाऊं,
ना मैं जानू कुछ भी मैया,
मैं तो हूं माँ अज्ञानी,
कंठ बसो महारानी,
कंठ बसो महारानी।।

नाम तेरा गाँऊ,
दर्श तेरा पाऊँ,
छोड़ तुम्हें मैं शारदे मैया,
मुझको बता कहां जाऊं,
मुझको बता कहां जाऊं,
तेरे चरणों में अर्पण है,
‘आनंद’ की जिंदगानी,
कंठ बसो महारानी,
कंठ बसो महारानी।।

मेरे स्वरों को अपना स्वर दो,
गाऊँ मैं तेरी वाणी,
कंठ बसो महारानी,
कंठ बसो महारानी।।

गायक / लेखक – आनन्द राज बर्मन।

माँ सरस्वती की महिमा अपार है, उनकी कृपा जिस पर बरसती है, वह सच्चे ज्ञान, संगीत और कला की ओर अग्रसर होता है। यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो माँ की भक्ति में और भी डूबने के लिए “ज्ञान की ज्योति जगा देना” भजन को भी सुनें और माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त करें। ????✨

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