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सतगुरु तुम सागर मैं मीना तुम बिन रह ना पाउंगी लिरिक्स

गुरुदेव के बिना यह जीवन अधूरा है, ठीक वैसे ही जैसे जल के बिना मछली तड़पती है। “सतगुरु तुम सागर मैं मीना तुम बिन रह ना पाउंगी” भजन में शिष्य की अनंत भक्ति और समर्पण की गहराई व्यक्त की गई है। यह भजन दर्शाता है कि भक्त के लिए गुरु ही संपूर्ण संसार हैं, और उनके बिना एक पल भी रहना असंभव प्रतीत होता है।

Satguru Tum Sagar Mai Meena Tum Bin Rah Na Paungi Lyrics

सतगुरु तुम सागर मैं मीना,
तुम बिन रह ना पाउंगी,
तुमसे दो पल की दुरी,
गुरूजी सह ना पाउंगी।।

चल रही है जिन्दगी,
उलटी भी धार में,
और दिख रही है जीत,
जीवन की हार में,
हारी बाजी जीवन की,
हारी बाजी जीवन की,
गुरूजी जीत जाउंगी,
तुमसे दो पल की दुरी,
गुरूजी सह ना पाउंगी।।

हरियाली ही हरियाली है,
जीवन के खेत में,
ठंडक सी मिल रही है,
जलती सी रेत में,
तुम साथ हो हमारे,
तुम साथ हो हमारे,
तो मैं चलती जाउंगी,
तुमसे दो पल की दुरी,
गुरूजी सह ना पाउंगी।।

खुद की समझ हुई है,
अध्यात्म से मुझे,
मिलवा दिया है तुमसे,
खुद आत्म से मुझे,
मिलने लगी हूँ खुद से,
मिलने लगी हूँ खुद से,
अब मैं मिलती जाउंगी,
तुमसे दो पल की दुरी,
गुरूजी सह ना पाउंगी।।

सतगुरु तुम सागर मैं मीना,
तुम बिन रह ना पाउंगी,
तुमसे दो पल की दुरी,
गुरूजी सह ना पाउंगी।।

गुरुदेव की कृपा ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा आधार है, और उनकी शरण में ही सच्ची शांति मिलती है। यदि यह भजन आपके हृदय में भक्ति की भावना जागृत कर रहा है, तो “गुरुवर तुमसे इतना कहना चरणों में तुम्हरे रहना”, “सतगुरु चरणा कोलो कदे दूर हटावी ना”, “गुरुवर के चरणों में मेरा है प्रणाम” और “गुरुदेव की महिमा गाए चरणों में शिश नवाए” जैसे अन्य भजनों को भी पढ़ें और गुरुदेव की भक्ति में लीन हों।









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