Ram Teri Ganga Maili Ho Gayi
दोहा –
तेरी धरोहर तेरी निशानी,
लिए फिरूँ मैं बनी दीवानी,
भुलाने वाले कभी तो आजा,
की तेरी गंगा है पानी पानी,
की तेरी गंगा है पानी पानी।।
एक दुखियारी कहे,
बात ये रोते रोते,
राम तेरी गंगा मैली हो गई,
पापियों के पाप धोते धोते,
हो ओ …
राम तेरी गंगा मैली हो गईं,
पापियों के पाप धोते धोते।।
धरती पर उतरी थी लेकर,
कितना पावन पानी,
हो ओ…
इसमें नहाये कामी क्रोधी,
लोभी खल अज्ञानी,
लायी दूध जैसी धारा,
गया स्वर्ग से उतारा,
इसकी बूंदों में है जीवन,
इसकी लहरो में किनारा,
नदी और नारी,
हो ओ…
नदी और नारी रहे,
औरों का कलंक सर ढ़ोते,
राम तेरी गंगा मैली हो गईं,
पापियों के पाप धोते धोते।।
आत्मा है इक सच्चा हीरा,
काया है इक थैली हो ओ,
हीरें को मत झूठा कहना,
थैली देख के मैली,
कोई ताने मत मारो,
इसकी आरती उतारो,
देवी कह के पुकारों,
मन की आँखों से निहारों,
करो रखवारी,
हो ओ,
करो रखवारी इस,
हीरे की जाग के सोते,
राम तेरी गंगा मैली हो गयी,
पापियों के पाप धोते धोते।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile