Sitaram Sitaram Sitaram Kahiye Jaahi vidhi Rakhe Ram
सीताराम सीताराम सीताराम कहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।।
ज़िन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के,
महलों मे राखे चाहे झोंपड़ी मे वास दे…
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।।
किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा,
होगा प्यारे वही जो श्री रामजी को भायेगा…
फल आशा त्याग शुभ काम करते रहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।।
आशा एक रामजी से दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक रामजी से दूजा नाता तोड़ दे…
साधु संग राम रंग अंग अंग रंगिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।।
मुख में हो राम नाम राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नाहिं प्यारे राम तेरे साथ में…
विधि का विधान जान हानि लाभ सहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।।
सीताराम सीताराम सीताराम कहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile