Shri Ram Dhun Me Man Tu Jab Tak Magan Na Hoga
श्री राम धुन में मन तू,
जब तक मगन ना होगा।।
भव जाल छूटने का,
तब तक जतन ना होगा।।
व्यापार धन कमाकर,
तू लाख साज सजले,
होगा सुखी ना तब तक।।
होगा सुखी ना तब तक,
संतोष धन ना होगा।
श्री राम धुन मे मन तू,
जब तक मगन ना होगा।।
भव जाल छूटने का,
तब तक जतन ना होगा।।
तप यज्ञ होम पूजा,
व्रत और नैम कर ले,
सब व्यर्थ है जो मुख से।
सब व्यर्थ है जो मुख से,
हरी का भजन ना होगा।
श्री राम धुन मे मन तू,
जब तक मगन ना होगा।।
भव जाल छूटने का,
तब तक जतन ना होगा।।
संसार की घटा से,
क्या प्यास बुझ सकेगी,
प्यासे ह्रदय को जब तक।
प्यासे ह्रदय को जब तक,
तेरा ना धन मिलेगा।
श्री राम धुन मे मन तू,
जब तक मगन ना होगा।।
भव जाल छूटने का,
तब तक जतन ना होगा।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile