Ram Sunalo Meri Baat Tum Gaur Se
राम सुनलो मेरी बात तुम गौर से,
क्यों पराजित हुआ आपसे युद्ध में…
जानकी की वजह से ना मैं मर सका,
जानकी की तरफ से रहा शुद्ध मैं…
राम सुन लो मेरी बात तुम गौर से।।
राज्य मेरा बड़ा कुल भी मेरा बड़ा,
बल भी मेरा बड़ा आयु मेरी बड़ी…
वेद चारों छेओ शाश्त्र कंठस्त है,
ज्ञान में भी बड़ा तुमसे प्रभुत्व में…
राम सुन लो मेरी बात तुम गौर से।।
मेरे रहने व सोने को स्वर्ण महल,
है खजाना मेरा ये अवध से बड़ा…
देवता भी मेरे घर करे चाकरी,
देवराहों को कर देता अवरुद्ध मैं…
राम सुन लो मेरी बात तुम गौर से।।
मैंने अपनों को ठुकरा के गलती करी,
‘बावरा’ तुमने अपने लगाए गले…
वो भरत तेरा भाई तेरे संग खड़ा,
मेरा भाई खड़ा मेरे विरुद्ध में…
राम सुन लो मेरी बात तुम गौर से।।
राम सुनलो मेरी बात तुम गौर से,
क्यों पराजित हुआ आपसे युद्ध में…
जानकी की वजह से ना मैं मर सका,
जानकी की तरफ से रहा शुद्ध मैं…
राम सुन लो मेरी बात तुम गौर से।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile