Ram gun Gaya Nahi Gayak HUa To Kya Hua
राम गुण गाया नहीं,
गायक हुआ तो क्या हुआ…
पितु मातु मन भाया नहीं,
लायक हुआ तो क्या हुआ।।
गंगा नहाये प्रेम से,
धोये धोय तन निर्मल किया,
मन मैला धोया नही…
गंगा नहाये से क्या हुआ,
राम गुण गाया नही…
गायक हुआ तो क्या हुआ।।
गाड़ी चढ़ छेला बने वे,
बागों में मैं घूमता,
घर की सती रोती रहे…
बाबू बने तो क्या हुआ,
राम गुण गाया नही…
गायक हुआ तो क्या हुआ।।
खाकर नमक मालिक का,
सेवा भी मुख मोड़ता,
वो नोकर नमक हराम है…
चाकर हुआ तो क्या हुआ,
राम गुण गाया नही…
गायक हुआ तो क्या हुआ।।
विद्या पढ़ पढ़ ज्ञानी बन गया,
राम रंग रच्या नहीं,
दिल खोया वाद विवाद में…
फिर पछताए क्या हुआ,
राम गुण गाया नही…
गायक हुआ तो क्या हुआ।।
मात पिता की जीते जी,
सेवा तुमसे न बनी,
मरे पीछे श्राद्ध या तर्पण…
करे तो क्या हुआ,
राम गुण गाया नही…
गायक हुआ तो क्या हुआ।।
राम गुण गाया नहीं,
गायक हुआ तो क्या हुआ…
पितु मातु मन भाया नहीं,
लायक हुआ तो क्या हुआ।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile