केतु गायत्री मंत्र का जाप जीवन में आ रही अदृश्य बाधाओं, मानसिक भ्रम और आध्यात्मिक रुकावटों को दूर करता है। Kethu Gayatri Mantra विशेष रूप से राहु-केतु दोष शांति और कुण्डली में केतु ग्रह के दोष को शांत करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। नियमित जाप से आंतरिक स्पष्टता और आत्मिक बल मिलता है।
Kethu Gayatri Mantra
ॐ पद्मपुत्राय् विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो केतु: प्रचोदयात्॥
ॐ अश्वाध्वजाय विद्महे शूलाहस्ताय धीमहि तन्नो केतु: प्रचोदयात॥
ॐ गद्दाह्स्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्न: केतु: प्रचोदयात॥

Kethu Bhagavan Gayatri Mantra के साथ- साथ यदि आप नवग्रह मंत्रों की पूरी श्रृंखला पढ़ना चाहते हैं, तो हमारे विशेष लेख राहु गायत्री मंत्र, नवग्रह गायत्री मंत्र और शनि गायत्री मंत्र को भी अवश्य देखें। भक्ति सन्देश में हम हर मंत्र को पूरी श्रद्धा, जानकारी और आध्यात्मिक दृष्टि से प्रस्तुत करते हैं।
Ketu Gayatri Mantra की मुख्य जाप विधि
- जाप का समय: केतु मंत्र का जाप प्रातः सूर्योदय से पूर्व या रात्रि के शांत समय में करना श्रेष्ठ माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को यह जाप विशेष रूप से लाभकारी होता है।
- दिशा चयन: कुशासन या लाल वस्त्रों पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। ध्यान केन्द्रित रखें और मानसिक रूप से केतु ग्रह की शांति हेतु प्रार्थना करें।
- पूजन सामग्री: केतु की मूर्ति या फोटो, सफेद फूल, दूर्वा, गाय का घी, कपूर, और रुद्राक्ष की माला। अगरबत्ती और दीपक जलाकर वातावरण को पवित्र करें।
- मंत्र जाप : मंत्र का जाप 108 बार करें और पूर्ण श्रद्धा से उच्चारण करें। यह मंत्र केतु दोष से मुक्ति, आध्यात्मिक जागरूकता, और मानसिक शांति प्रदान करता है।
- जाप के बाद की प्रक्रिया: जाप समाप्त होने के बाद केतु देवता को सफेद तिल या खीर का नैवेद्य अर्पण करें। मन से आभार प्रकट करें और अपने जीवन से भ्रम, डर व अज्ञात बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें।
FAQ
जिन्हें केतु ग्रह के कारण जीवन में बाधाएं, भ्रम, मानसिक बेचैनी या राहु-केतु दोष हो, वे इसे जाप करें।
हाँ, केतु गायत्री मंत्र कुण्डली के दोषों को शांत करने में मदद करता है।
नियमित और निष्ठा से किए गए जाप का असर कुछ ही दिनों में मानसिक और भावनात्मक स्तर पर अनुभव होने लगता है।
हाँ, यह जाप आप घर में पवित्र वातावरण बनाकर पूर्ण श्रद्धा से कर सकते हैं।