ना स्वर है ना सरगम हैना स्वर है ना सरगम है,

भक्ति की धारा में जब सुर और ताल का संगम होता है, तब मन प्रभु की आराधना में खो जाता है। लेकिन क्या हो, अगर सुर और सरगम के बिना भी भक्ति की शक्ति अपनी पूर्णता को प्राप्त कर ले? ना स्वर है ना सरगम है भजन हमें यही एहसास कराता है कि हनुमान जी की महिमा का गुणगान किसी राग या स्वर पर निर्भर नहीं, बल्कि सच्चे मन की भक्ति ही सबसे बड़ा संगीत है।

Na Swar Hai Na Sargam Haina Swar Hai Na Sargam Hai

ना लय न तराना है
हनुमान के चरणो में,
एक फूल चढ़ाना है।।

तुम बाल समय में प्रभु
सूरज को निगल डाले,
अभिमानी सुरपति के
सब दर्प मसल डाले,
बजरंग हुए तब से,
संसार ने जाना है
ना स्वर हैं न सरगम हैं,
ना लय न तराना है।।

सब दुर्ग ढ़हाकर के
लंका को जलाए तुम,
सीता की खबर लाये
लक्ष्मण को बचाये तुम,
प्रिय भरत सरिस तुमको
श्री राम ने माना है,
ना स्वर हैं न सरगम हैं,
ना लय न तराना है।।

जब राम नाम तुमने,
पाया ना नगीने में
तुम चीर दिए सीना,
सिया राम थे सीने में
विस्मित जग ने देखा,
कपि राम दीवाना है
ना स्वर हैं ना सरगम हैं,
ना लय न तराना है।।

हे अजर अमर स्वामी,
तुम हो अन्तर्यामी
ये दीन हीन चंचल,
अभिमानी अज्ञानी
तुमने जो नजर फेरी,
फिर कौन ठिकाना है
ना स्वर हैं ना सरगम हैं,
ना लय न तराना है।।

ना स्वर है ना सरगम है,
ना लय न तराना है
हनुमान के चरणो में,
एक फूल चढ़ाना है।।हनुमान जी भजन लिरिक्स

हनुमान जी की भक्ति में डूबे हुए भक्तों के लिए यह भजन एक आत्मीय अनुभव है, जो हमें यह एहसास कराता है कि प्रेम और श्रद्धा से किया गया स्मरण किसी भी स्वर से बढ़कर होता है। जब हम संकटमोचन के चरणों में समर्पित होते हैं, तब हर ध्वनि, हर भाव एक दिव्य संगीत बन जाता है। अगर आपको यह भजन पसंद आया, तो बालाजी से बड़ो ना बलवान कोई भजन भी सुनें, जो उनकी महिमा और शक्ति का अद्भुत वर्णन करता है।

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