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आज्ञा नही है माँ मुझे किसी और काम की उमा लहरी भजन

आज्ञा नहीं है माँ मुझे किसी और काम की भजन भक्त के गहरे समर्पण और भक्ति भाव को प्रकट करता है। यह भजन माँ के प्रति अटूट प्रेम और सेवा को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपने जीवन का हर क्षण माँ की सेवा और भक्ति में लगाना चाहता है। जब मन में निश्चल प्रेम और समर्पण होता है, तो हर कार्य माँ की कृपा से सफल हो जाता है।

Agya Nhi Hai Maa Mujhe Kisi Aur Kam

आज्ञा नही है माँ मुझे,
किसी और काम की
वरना भुजाएँ तोड़ दूँ,
सौगंध राम की।।

लंका पाताल ठोक दूँ,
रावण के शान की
धरती में जिन्दा गाढ़ दूँ,
सौगंध राम की।
ना झूठी शान करूँ,
ना अभिमान करूँ
प्रभु का ध्यान धरूँ,
राम गुणगान करूँ
सच्चे दया के धाम है,
रघुकुल की शान है
बल हूँ मै बल के धाम वो,
सौगंध राम की।
आज्ञा नहीं है माँ मुझे,
किसी और काम की
वरना भुजाएँ तोड़ दूँ,
सौगंध राम की।।

कर ना सका जो कोई भी,
कर के दिखा दिया
सेवक ने अपने स्वामी पे,
कर्जा चढ़ा दिया।
आज्ञा नहीं है माँ मुझे,
किसी और काम की
वरना भुजाएँ तोड़ दूँ,
सौगंध राम की।।

विश्वास करलो माँ मेरा,
आयेंगे राम जी
रावण को दंड दे के,
ले जायेंगे राम जी,
तब तक न खोना धैर्य माँ
तुम्हे सौगंध राम की।
आज्ञा नहीं है माँ मुझे,
किसी और काम की
वरना भुजाएँ तोड़ दूँ,
सौगंध राम की।।

दुष्टों को मार कर प्रभु,
बैठे विमान पर
बोली यूँ सीता माँ कृपा,
अंजनी के लाल पर
‘लहरी’ कहा वो कर दिया,
सौगंध राम की।
आज्ञा नही है माँ मुझे,
किसी और काम की
वरना भुजाएँ तोड़ दूँ,
सौगंध राम की।।

माँ की भक्ति से बड़ा कोई कार्य नहीं, और जब भक्त का मन माँ की सेवा में लीन हो जाता है, तो जीवन के हर कष्ट दूर हो जाते हैं। अगर यह भजन आपके मन को सुकून देता है, तो राम के दास रस्ता दिखा दो उमा लहरी भजन और हर मन के संकट हरता ये संकट मोचन दाता जैसे भजनों को भी जरूर सुनें और अपने हृदय में भक्ति की ज्योति जलाएं।

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