भगवान और भक्त का संबंध अटूट होता है, और जब बात श्रीराम और उनके अनन्य भक्तों की हो, तो यह भक्ति भाव और भी अद्भुत हो जाता है। ऐसे भक्त कहाँ कहाँ जग में, ऐसे भगवान रामायण भजन में भगवान राम और उनके महान भक्तों की महिमा का गुणगान किया गया है। यह भजन हमें उनकी निस्वार्थ भक्ति और श्रीराम की अपार कृपा का अनुभव कराता है। आइए, इस भजन के माध्यम से राम भक्तों की भक्ति को नमन करें।
Aise Bhakt Kaha, Jaha Jag me Aise Bhagwan
दोहा –
दुर्गम पर्वत मारग पे,
निज सेवक के संग आइए स्वामी।
भक्त के काँधे पे आन बिराजिए,
भक्त का मान बढ़ाइए स्वामी।।
ऐसे भक्त कहाँ,
कहाँ जग मे ऐसे भगवान।
ऐसे भक्त कहाँ,
कहाँ जग मे ऐसे भगवान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।।
राम पयो दधि हनुमत हंसा,
अति प्रसन्न सुनी नाथ प्रसंसा।
निसि दिन रहत राम के द्वारे,
राम महा निधि कपि रखवारे।
राम चंद्र हनुमान चकोरा,
चितवत रहत राम की ओरा।
भक्त शिरोमणि ने,
भक्त वत्सल को लिया पहचान,।
भक्त शिरोमणि ने,
भक्त वत्सल को लिया पहचान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।।
राम लखन अरु हनुमत वीरा,
मानहू पारखी संपुट हीरा।
तीनो होत सुसोभित ऐसे,
तीन लोक एक संग हो जैसे।
पुलकित गात नैन जल छायो,
अकथनीय सुख हनुमत पायो।
आज नही जग मे कोई,
बजरंगी सा धनवान।
आज नही जग मे कोई,
बजरंगी सा धनवान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।।
विद्यावान गुणी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर।
आपन तेज सम्हारो आपे,
तीनो लोक हाकते कांपे।
दुर्गम काज जगत के जेते,
सुगम अनुग्रह तुम्हारे तेते।
प्रभु वर से माँगो सदा,
पद सेवा को वरदान।
प्रभु वर से माँगो सदा,
पद सेवा को वरदान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।।
ऐसे भक्त कहाँ,
कहाँ जग मे ऐसे भगवान।
ऐसे भक्त कहाँ,
कहाँ जग मे ऐसे भगवान,
काँधे पर दो वीर बिठाकर।
चले वीर हनुमान,
काँधे पर दो वीर बिठाकर,
चले वीर हनुमान।।
श्रीराम के भक्तों की भक्ति और समर्पण अद्वितीय है, और यह भजन उसी भावना को दर्शाता है। जो भी सच्चे मन से प्रभु राम की भक्ति करता है, वह उनके प्रेम और कृपा का पात्र बनता है। यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला भजन भी जरूर सुनें और प्रभु की भक्ति में रम जाएं।

I am Shri Nath Pandey and I am a priest in a temple, which is located in Varanasi. I have been spending my life worshiping for the last 6 years. I have dedicated my soul completely to the service of God. Our website is a source related to Aarti, Stotra, Chalisa, Mantra, Festivals, Vrat, Rituals, and Sanatan Lifestyle. View Profile