बड़ी देर भई मेरे बाला भजन एक भक्त की हनुमान जी से जुड़ी भावनाओं को व्यक्त करता है। इसमें भक्त हनुमान जी से उनकी कृपा की प्रार्थना करते हुए, यह कहता है कि बहुत समय हो गया, लेकिन हनुमान जी की कृपा अब तक नहीं मिली। भक्त का विश्वास अडिग है कि उनका संकट जल्दी ही दूर होगा और उनके जीवन में हनुमान जी का आशीर्वाद शीघ्र आएगा। यह भजन एक प्रतीक है विश्वास और धैर्य का, जो हनुमान जी में गहरी श्रद्धा रखने वाले भक्त अपने जीवन में निभाते हैं।
Badi Der Bhai Mere Bala, Tum Kaha Ho Anjani Ke Lala
बड़ी देर भई मेरे बाला,
तुम कहाँ हो अंजनी लाला।
अपने दरश करा दो,
तेरो रूप बड़ो मतवाला।
बडी देर भई मेरे बाला,
तुम कहाँ हो अंजनी लाला।।
भक्त तुम्हारे बाला देखो,
कब से राह निहारे है।
चाँद भी बैठा आँखे खोले,
इंतजार में तारे है।
कीर्तन की इस रात मे तेरे,
नाम की फेरे माला।
बडी देर भई मेरे बाला,
तुम कहाँ हो अंजनी लाला।।
बाला तुम्हारे नाम की ज्योति,
सब ने मन में जगाई है।
बड़ो नसीबों से मेरे बाला,
रात ये पावन आई है।
प्यास बुझा दो नैनो की,
हमें क्यों दुविधा में डाला है।
बडी देर भई मेरे बाला,
तुम कहाँ हो अंजनी लाला।।
बड़ी देर भई मेरे बाला,
तुम कहाँ हो अंजनी लाला।
अपने दरश करा दो,
तेरो रूप बड़ो मतवाला।
बडी देर भई मेरे बाला,
तुम कहाँ हो अंजनी लाला।।
बड़ी देर भई मेरे बाला भजन में भक्त का यह भाव है कि वह जानता है कि हनुमान जी कभी भी देर नहीं करते, परंतु भक्तों की परीक्षा लेते हैं। यह भजन दर्शाता है कि कठिनाइयाँ सिर्फ एक माध्यम हैं, जो भक्त को उनके इरादे मजबूत करने और भगवान की ओर अधिक आकर्षित करने के लिए आती हैं। जैसे-जैसे भक्त का विश्वास मजबूत होता जाता है, वैसे-वैसे हनुमान जी की कृपा अधिक प्रकट होती है, और वह अपने भक्तों की सभी परेशानियों को सुलझा देते हैं।