एक दिन सीता जी से रघुवर बोले भरे दरबार में भजन रामायण की एक प्रसिद्ध घटना को दर्शाता है, जहाँ भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सीता माता से बात की थी। यह भजन भगवान श्रीराम की महानता, उनके धर्म के प्रति निष्ठा और उनके द्वारा की गई कठिन परिस्थितियों में लिए गए फैसलों को प्रदर्शित करता है। इस भजन में उनके द्वारा अपनाए गए उच्च आदर्शों और उनके जीवन के प्रेरणादायक संदेशों को उजागर किया गया है।
Ek Din Seeta Ji Se Raghuvar Bole Bhare Darbar Me
एक दिन सीता जी से रघुवर,
बोले भरे दरबार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।।
देखे बड़े तपस्वी,
बड़े बड़े कई ज्ञानी।
बल बुद्धि विद्या में,
इसका नहीं कोई सानी।
दिखने में सब भले है लगते,
स्वारथ है व्यवहार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
इक दिन सीता जी से रघुवर,
बोले भरे दरबार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।।
आठो पहर में देखो,
सेवा को तैयार है।
चाहे जैसा काम हो,
करता ना इंकार है।
इनकी सेवा का क्या कहना,
शब्द नहीं मेरे पास में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
इक दिन सीता जी से रघुवर,
बोले भरे दरबार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।।
कलयुग तेरे नाम है,
ये मेरा वरदान है।
ऐसे भक्त पे सीता सुन,
मुझको तो अभिमान है।
बांध लिया है मुझको ‘मोहित’,
इसने अपने प्यार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
इक दिन सीता जी से रघुवर,
बोले भरे दरबार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।।
एक दिन सीता जी से रघुवर,
बोले भरे दरबार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।
हनुमान सा ना देखा,
मैंने इस संसार में।।
भरे दरबार में भगवान श्रीराम का निर्णय, उनके अनुशासन, और धर्म के प्रति उनके अडिग विश्वास को हम सभी को अपनाना चाहिए। यह भजन न केवल राम के उच्च आदर्शों को समझाता है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना हमेशा सर्वोत्तम होता है, चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं। यह भजन हमें यह भी याद दिलाता है कि हर कर्तव्य, चाहे वह व्यक्तिगत हो या सार्वजनिक, ईश्वर के आदेश के अनुसार निष्पक्ष और सच्चे मन से किया जाना चाहिए। श्रीराम का जीवन हम सभी के लिए एक आदर्श है और यह भजन हमें उनके मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जय श्रीराम!