सालासर के मंदिर में यो भगत बावरो नाचे रे भजन में सालासर धाम की महिमा और यहाँ के भक्तों की भक्ति को व्यक्त किया गया है। यह भजन सालासर के मंदिर में भगवान हनुमान की पूजा और भक्तों के उल्लास को दर्शाता है, जहाँ लोग नाचते-गाते हुए अपने ह्रदय में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान हनुमान की आराधना करते हैं।
Salasar Ke Mandir Me Yo Bhagat Babaro Nache Re
सालासर के मंदिर में यो,
भगत बावरो नाचे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।।
भोलो भालो जाट को छोरो,
रूप गजब को ढायो रे।
सालासर में यूँ लागे,
ज्यूँ अंजनी लालो आयो रे।
लाल लंगोटो हाथा में घोटो,
पगा में घुंघरू बाजे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।
सालासर के मन्दिर में यो,
भगत बावरो नाचे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।।
राम ने भजतो छम छम करतो,
थाने लाड़ लडावे रे।
मस्त मगन हो मस्ती में,
थारा ही गुण गावे रे।
जयकारा से गूंजे मंदिर,
बेगो बेगो आजे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।
सालासर के मन्दिर में यो,
भगत बावरो नाचे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।।
ज्यूँ लंका में कुद्यो हनुमत,
कुद्यो अंगना थारे रे।
झटपट यो युक्ति ने लगावे,
सामने बैठ के थारे रे।
अष्ट सिध्धि नवनिधि का बाबा,
नैया पार लगा जे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।
सालासर के मन्दिर में यो,
भगत बावरो नाचे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।।
सब भक्ता की विनती सुनलो,
बालाजी थारो ध्यान धरो।
चुरमो ल्यायो लाडू ल्यायो,
जो बने यो स्वीकार करो।
‘सज्जन’ बाबो भाव को भूखो,
सालासर में विराजे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।
सालासर के मन्दिर में यो,
भगत बावरो नाचे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।।
सालासर के मंदिर में यो,
भगत बावरो नाचे रे।
आप भी नाचे और नचावे,
थारो चालीसो बांचे रे।।
यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब हम सच्चे दिल से भगवान हनुमान की पूजा करते हैं, तो हम हर प्रकार की दुनिया की मुश्किलों से पार हो जाते हैं। सालासर के मंदिर में भगतों का जो उल्लास और श्रद्धा दिखाई देती है, वह हनुमान जी की शक्ति और आशीर्वाद को स्पष्ट रूप से प्रकट करता है। हनुमान जी के आशीर्वाद से भक्त जीवन में हर कठिनाई को आसान बना लेते हैं और उनके रास्ते पर चलते हुए सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करते हैं। हमें भी भगवान हनुमान के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा को गहराई से महसूस करना चाहिए। जय श्रीराम! जय बजरंगबली!

I am Shri Nath Pandey and I am a priest in a temple, which is located in Varanasi. I have been spending my life worshiping for the last 6 years. I have dedicated my soul completely to the service of God. Our website is a source related to Aarti, Stotra, Chalisa, Mantra, Festivals, Vrat, Rituals, and Sanatan Lifestyle. View Profile