तोड़ तोड़ मणिया माला फेक रहे हनुमान भजन भक्तों को श्री हनुमानजी की भक्ति में डुबोने वाला एक सजीव और ऊर्जा से भरपूर गीत है। इस भजन में हनुमानजी की अपार शक्ति, उनकी भक्ति और उनके अद्भुत चमत्कारों का वर्णन किया गया है। जब भक्त प्रेमपूर्वक इस भजन को गाते हैं, तो उनकी भक्ति और श्रद्धा और अधिक प्रगाढ़ हो जाती है।
Tod Tod Madiya Mala fek Rahe Hanuman
तोड़ तोड़ मणिया माला,
फेक रहे हनुमान।
कर दिया विभीषण का पल में,
कर दिया विभीषण का पल में।
चूर चूर अभिमान,
तोड़ तोड़ मणियाँ माला।
फेक रहे हनुमान।।
दिव्य अलौकिक मोती माला,
श्री राम को भेंट मिली।
श्री राम ने मोती माला,
हाथ में सीता के रख दी।
कहा विभीषण ने सीता से,
कहा विभीषण ने सीता से।
रखना इसका ध्यान,
तोड़ तोड़ मणियाँ माला,
फेक रहे हनुमान।।
भरी सभा में सीता माँ ने,
हनुमत को माला दे दी।
हनुमत ने कुछ ढूंढा उसमे,
फिर टुकड़े टुकड़े कर दी।
बड़े क्रोध से बोले विभीषण,
बड़े क्रोध से बोले विभीषण।
हुआ मेरा अपमान,
तोड़ तोड़ मणियाँ माला,
फेक रहे हनुमान।।
राम ने पूछा हनुमान से,
काहे को माला तोड़ी।
हनुमत बोले सियाराम की,
इसमें नहीं दिखती जोड़ी।
जिस मोती में मेरे राम नहीं,
जिस मोती में मेरे राम नहीं।
वो मोती है पाषाण,
तोड़ तोड़ मणियाँ माला,
फेक रहे हनुमान।।
गर सीने में राम है तेरे,
मुझको दिखाओ तुम बाला।
इतना सुनकर हनुमान ने,
सीना फाड़ दिखा डाला।
कहे ‘श्याम’ की दर्शन करलो,
कहे ‘श्याम’ की दर्शन करलो।
सीने में है सियाराम,
तोड़ तोड़ मणियाँ माला।
फेक रहे हनुमान।।
तोड़ तोड़ मणिया माला,
फेक रहे हनुमान।
कर दिया विभीषण का पल में,
कर दिया विभीषण का पल में।
चूर चूर अभिमान।
तोड़ तोड़ मणियाँ माला,
फेक रहे हनुमान।।
हनुमानजी केवल बल और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे निस्वार्थ सेवा और भक्ति का जीवंत उदाहरण हैं। यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब हम पूर्ण समर्पण और विश्वास के साथ श्री हनुमानजी की आराधना करते हैं, तो वे हमारी हर बाधा को दूर कर देते हैं। उनके नाम का स्मरण करने मात्र से ही मन को असीम शांति और आत्मबल की अनुभूति होती है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि भक्तों के हृदय की आस्था का प्रतिबिंब है। जब हम श्रद्धा और प्रेम से इस भजन का गायन करते हैं, तो ऐसा लगता है मानो स्वयं हनुमानजी हमारे पास विराजमान होकर हमें अपनी कृपा और आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं।