हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारो भजन हर भक्त की वह विनम्र प्रार्थना है, जिसमें वह अपने आराध्य से अपने घर में आने का निवेदन करता है। संकटमोचन हनुमान जी जहां भी जाते हैं, वहां हर तरह की नकारात्मकता दूर हो जाती है, और सुख-समृद्धि का वास होता है। यह भजन श्रद्धालुओं के हृदय में आस्था और प्रेम की भावना को जागृत करता है और भक्तों को प्रभु के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।
Hanuman ji kabhi mere Ghar Bhi Padharo
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारो।
बुद्धि विवेक की बारिश करके,
बुद्धि विवेक की बारिश करके।
मेरा भी जीवन तारो,
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारों।।
तुम बलशाली हो ग्रन्थ के ज्ञाता।
तुम बिन कोई भी पार ना पाता,
तेरी महिमा गाके हनुमत।
तेरी महिमा गाके हनुमत,
तर गए लाख हजारो।
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारों।।
सादर सेवा की भाव जगी है,
तेरे दरश की आस लगी है।
हम है तुम्हरे भक्त वो हनुमत,
हम है तुम्हरे भक्त वो हनुमत।
ऐसे ना हमको बिसारो,
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारों।।
भक्त परदेसी के तुम हितकारी,
गावे ‘निरंजन’ महिमा तुम्हारी।
जीवन नैया बिच भंवर में,
जीवन नैया बिच भंवर में।
आके पार उतारो,
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारों।।
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारो,
बुद्धि विवेक की बारिश करके।
बुद्धि विवेक की बारिश करके,
मेरा भी जीवन तारो।
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारों।।
हनुमान जी केवल शक्ति और पराक्रम के प्रतीक ही नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति का सजीव उदाहरण भी हैं। हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारो भजन हमें यह सिखाता है कि जब तक हम अपने हृदय रूपी मंदिर में श्रद्धा और समर्पण का दीप नहीं जलाते, तब तक हमें सच्ची भक्ति का आनंद प्राप्त नहीं हो सकता। हनुमान जी की कृपा जहां होती है, वहां हर संकट स्वयं ही समाप्त हो जाता है।
यह भजन हमें यह संदेश देता है कि हमें अपने जीवन में हनुमान जी की भक्ति को आत्मसात करना चाहिए और सच्चे मन से उन्हें अपने घर व हृदय में आमंत्रित करना चाहिए। जब भक्त सच्चे मन से पुकारता है, तो हनुमान जी अवश्य उसकी रक्षा के लिए आते हैं। आइए, इस भजन का आनंद लें और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करें। जय श्रीराम! जय बजरंग बली!