कोई ऐसी खोल नहीं है जिसमें तू छुप पायेगा यह भजन प्रभु श्रीराम के अद्वितीय स्वरूप और शक्ति को दर्शाता है। यह भजन हमें यह संदेश देता है कि प्रभु राम सर्वशक्तिमान हैं और उनके सामने कोई भी शक्ति या विरोध उन्हें रोक नहीं सकता। संसार की सारी वस्तुएं और शक्तियाँ, चाहे वह कितनी भी मजबूत क्यों न हो, राम की महिमा के सामने फीकी हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त प्रभु राम के प्रति अपनी श्रद्धा और विश्वास को और भी गहरा करते हैं। पढ़ें और महसूस करें उस परम शक्ति का अस्तित्व जो हर स्थिति में साथ रहती है।
Koi Aisi Khol Nahi Hai Jasame Tu Chhup Payega
कोई ऐसी खोल नहीं है,
जिसमें तू छुप पायेगा।।
दोहा –
शीश ढको तो पाँव खुले रे,
पाँव ढको तो शीश।
अजब चदरिया तृष्णा की है,
जिसमे जीवन जाए बीत।
कोई ऐसी खोल नहीं है,
जिसमें तू छुप पायेगा।
प्रभु के नाम की ओढ़ चदरिया,
तन मन सब डक जाएगा।।
बड़े गुण वाली प्रभु नाम की चदरिया,
जिसमें प्रभु से मांगी मिली चदरिया,
तुलसीदास ने भक्ति करके।
राम चदरिया ओढ़ ली,
रामचरित गाकर के राम मय।
बन गई जग में तुलसी,
बिना वस्त्र तू आया जगत में,
बिना वस्त्र ही जाएगा।
प्रभु के नाम की ओढ़ चदरिया,
तन मन सब डक जाएगा।
कोईं ऐसी खोल नही है,
जिसमें तू छुप पायेगा।।
मीरा ने ओढ़ी कृष्ण नाम की चदरिया,
नंदलाला की मन में बाजी बसुरिया,
विष का प्याला राणा भेजा।
पी गई मीरा हंसकर,
सारा विश अमृत सा हो गया,
कृष्ण चदरिया छूकर।
अजर अमर प्रभु नाम चदरिया,
ओढ़ अमर पद पायेगा,
प्रभु के नाम की ओड़ चदरिया।
प्रभु के नाम की ओढ़ चदरिया,
तन मन सब डक जाएगा।
कोईं ऐसी खोल नही है,
जिसमें तू छुप पायेगा।।
सूर ने ओढ़ी हरी नाम की चदरिया,
दर्शन पाए प्रभु सूर बिन अखियां,
श्याम सुंदर के बाल रूप में।
रमी भावना उनकी,
भक्ति में शक्ति फिर जागी,
खुल गई अखियां मन की।
प्रभु के नाम की ज्योत जगा तू,
हरि का दर्शन पायेगा,
प्रभु के नाम की ओढ़ चदरिया।
तन मन सब डक जाएगा,
कोईं ऐसी खोल नही है,
जिसमें तू छुप पायेगा।।
कोईं ऐसी खोल नहीं है,
जिसमें तू छुप पायेगा।
प्रभु के नाम की ओढ़ चदरिया,
तन मन सब डक जाएगा।।
कोई ऐसी खोल नहीं है जिसमें तू छुप पायेगा भजन प्रभु राम की अपरिमित शक्ति और उनके साथ होने का अहसास कराता है। इस भजन के साथ-साथ आप राम नाम जप ले एक यही संग जाई, राम नाम का प्याला प्यारे पि ले सुबहो शाम और राम सिया राम से नयनाभिरामा से कह देना मेरा प्रणाम जैसे अन्य भजनों को भी पढ़ सकते हैं, जो प्रभु के नाम और उनके दिव्य रूप की महिमा को बखूबी प्रस्तुत करते हैं। जय श्रीराम!

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile