पिंजरा के पंछी बोले रही रही के कुण्डी खोले – छत्तीसगढ़ी भजन

पिंजरा के पंछी बोले रही रही के कुण्डी खोले यह छत्तीसगढ़ी भजन आत्मा की पुकार है, जो अपने परमात्मा से मिलन की व्याकुलता को दर्शाता है। मैं, पंडित सत्य प्रकाश, इस मधुर भजन के माध्यम से आपको आत्मचिंतन और श्रीराम जी की ओर एक आध्यात्मिक यात्रा पर आमंत्रित करता हूँ। यह गीत जीवन के उस सत्य को छूता है जहाँ पिंजरे में कैद जीव अपने मोक्ष की बाट जोहता है।

Pinjara Ke Pankshi Bole Rahi Rahi Ke Kundi Khole

पिंजरा के पंछी बोले,
रही रही के कुण्डी खोले…
मोला पार लगादे राम,
मोला पार लगादे राम…
मोला जाना है,
जाना है राम लाला के धाम।।

राम राम के नाम ला लेवत,
फुर फुर में उड़ जाहु…
कतको मोला पकड़बे तेहा,
तोर हाथ नई आहु…
कतको मोला पकड़बे मेहा,
तोर हाथ नए आहु…
तोर चरण मा में गिर जाहु,
जीवन ला सुफल बनाहु…
मोला पार लगादे राम,
मोला जाना है,
जाना है राम लाला के धाम।।

का करहु तोर रतन सिहासन,
का तोर महल अटारी…
मोर बर सब माटी के ढेला,
सुनले रे संगवारी…
मोर बर सब माटी के ढेला,
सुन ले रे संगवारी…
जब तोर संदेशा आही,
सुवना मोर तन के उड़ाही…
मोला जाना है,
जाना है राम लाला के धाम।।

लाला चंचल राम दरश बर,
जीवन भर गुन गाइस…
राम नाम के महिमा गाके,
दुनिया मा बगराईस…
राम नाम के महिमा गाके,
दुनिया माँ बगराईस…
बेनाम के सुनले बानी,
सुवना ये तन के परानी…
मोला जाना है,
जाना है राम लाला के धाम।।

पिंजरा के पंछी बोले,
रही रही के कुण्डी खोले…
मोला पार लगादे राम,
मोला पार लगादे राम…
मोला जाना है,
जाना है राम लाला के धाम।।

पिंजरा के पंछी बोले भजन हमें अपने भीतर झाँकने की प्रेरणा देता है, जहाँ आत्मा परमात्मा की ओर पुकारती है। यह भजन मन को श्रीराम जी की भक्ति में सराबोर कर देता है और हमें जीवन के सत्य से जोड़ता है। ऐसे ही और भी भावपूर्ण भजन जैसे चोला माटी के हे राम, राम नाम का अमृत पी ले जन्म सफल हो जाएगा, जाऊं कहाँ तजि चरण तुम्हारे, और नैया अटक गयी बीच भँवरिया हे राजा राम को अवश्य पढ़ें और अपने जीवन को श्रीराम जी की भक्ति में रमायें। जय श्रीराम!

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