मेरे तन में भी राम, मेरे मन में भी राम यह भजन हमें प्रभु श्री राम की सर्वव्यापकता का अनुभव कराता है। यह हमें यह सिखाता है कि जब हम श्री राम के भक्ति भाव में लीन हो जाते हैं, तो हमारे तन-मन में वही बसे रहते हैं। उनकी महिमा का गुणगान करने से जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं और हृदय में शांति का वास होता है। इस भजन के माध्यम से हम यह समझते हैं कि राम केवल एक राजा नहीं, बल्कि हमारे जीवन के आधार हैं।
Mere Tan mein bhi Ram mere man mein bhi Ram
मेरे तन में भी राम,
मेरे मन में भी राम।
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे।।
जैसे चंदा में राम।
जैसे सूरज में राम,
अम्बर तारों में समाया तेरा नाम रे।
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे।।
जैसे भीलनी के राम,
जैसे मीरा के श्याम।
नर नारी में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे।।
जैसे सीता के राम,
जैसे राधा के श्याम।
पत्ते पत्ते में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे।।
मेरे तन में भी राम,
मेरे मन में भी राम।
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे।।
श्री राम के नाम में अपार शक्ति है, और उनकी भक्ति से ही जीवन का सच्चा आनंद प्राप्त किया जा सकता है। जब भक्त श्री राम के भजनों में खो जाता है, तब उसे सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिल जाती है। यदि आपको प्रभु की महिमा और भी गहराई से अनुभव करनी है, तो राम नाम का अमृत पी ले जन्म सफल हो जाएगा, राम के गीत सुनाते चलो, और भजो रे भैया राम गोविंद हरि जैसे भजनों का भी रसपान करें और प्रभु राम की कृपा का आनंद लें। ???? जय श्री राम!