कैसे बैठा रे आलस में मुख से राम कह्यो न जाये

भक्त के लिए सबसे बड़ा धन प्रभु श्रीराम का नाम है, लेकिन आलस्य और मोह के कारण कई बार हम नामस्मरण से दूर हो जाते हैं। कैसे बैठा रे आलस में, मुख से राम कह्यो न जाये भजन हमें यह प्रेरणा देता है कि जीवन के हर क्षण का उपयोग प्रभु श्रीराम के नाम जप में करना चाहिए। जो समय बीत जाता है, वह लौटकर नहीं आता, इसलिए हर श्वास को राममय बना लेना ही सच्ची भक्ति है।

Kaise Baitha Re Aalas Mein Mukh Se Ram Kaho Na Jaaye

कैसे बैठा रे आलस में
मुख से राम कह्यो न जाये,
तोसे श्याम कह्यो न जाये।।

भोर भये मल मल मुख धोये
दिन चढ़ते ही उदर टटोये,
बातन बातन सब दिन खायो
साँझ भई पलना में सोए,
सोवत सोवत उम्र बीत गयीं
काल शीश मंडराए रे,
तोसे राम कह्यो न जाये,
तोसे श्याम कह्यो न जाये।।

लख चौरासी में में भटक्यो
बड़े भाग्य मानुष तन पायो,
अबकी भूल न जाना भाई
लुट न जाये फिर ये कमाई,
राधेश्याम समय फिर ऐसो
बार बार नही आये रे,
तोसे राम कह्यो न जाये
तोसे श्याम कह्यो न जाये।।

कैसे बैठा रे आलस में
मुख से राम कह्यो न जाये,
तोसे श्याम कह्यो न जाये।।

राम नाम के बिना जीवन अधूरा है, और जो व्यक्ति इस सत्य को समझकर भक्ति के मार्ग पर चलता है, वही सच्चे सुख और शांति को प्राप्त करता है। कैसे बैठा रे आलस में, मुख से राम कह्यो न जाये भजन हमें चेतावनी देता है कि अब भी समय है, आलस्य त्यागें और श्रीराम के नाम में मन लगाएं। इस भक्ति रस को और गहराई से अनुभव करने के लिए राम से बड़ा राम का नाम, राम नाम जप ले, एक यही संग जाई, श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, अगर राघव के चरणों में जगह थोड़ी सी मिल जाए भजनों को भी पढ़ें और श्रीराम की भक्ति में लीन हो जाएं। जय श्रीराम! ????????

Leave a comment