केवट ने कहा रघुराई से उतराई ना लूंगा हे भगवन लिरिक्स

भक्त और भगवान के प्रेम की गाथा अनंत है, और इसी प्रेम का एक अनुपम उदाहरण केवट और प्रभु श्रीराम का प्रसंग है। केवट ने कहा रघुराई से, उतराई ना लूंगा हे भगवन भजन इस दिव्य भक्ति को प्रकट करता है, जिसमें निष्काम प्रेम और समर्पण की झलक मिलती है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब भक्ति निश्छल और निस्वार्थ होती है, तो स्वयं भगवान भी भक्त के प्रेम में बंध जाते हैं।

Kevat Ne Kaha Raghurai Se Utrai Na Lunga

केवट ने कहा रघुराई से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन,
उतराई ना लूंगा हे भगवन
केवट ने कहा रघुराईं से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन।।

मैं नदी नाल का सेवक हूँ,
तुम भवसागर के स्वामी हो,
मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ
तुम वहाँ पे पार लगा देना,
केवट ने कहा रघुराईं से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन।।

तूने अहिल्या को पार लगाया है,
मुझको भी पार लगा देना
मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ,
तुम वहाँ पे पार लगा देना
केवट ने कहा रघुराईं से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन।।

केवट ने कहा रघुराई से,
उतराई ना लूंगा हे भगवन
उतराई ना लूंगा हे भगवन,
केवट ने कहा रघुराईं से
उतराई ना लूंगा हे भगवन।।

केवट की भक्ति हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम के आगे कोई भी सांसारिक लेन-देन मायने नहीं रखता। केवट ने कहा रघुराई से, उतराई ना लूंगा हे भगवन भजन हमें यही संदेश देता है कि जब हम प्रभु राम के चरणों में पूर्ण समर्पण कर देते हैं, तो उनका प्रेम और आशीर्वाद हमें निर्बाध रूप से प्राप्त होता है। प्रभु श्रीराम की इस अनमोल भक्ति भावना को और अधिक अनुभव करने के लिए राम से बड़ा राम का नाम, श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, अगर राघव के चरणों में जगह थोड़ी सी मिल जाए, राम नाम जप ले, एक यही संग जाई भजनों को भी पढ़ें और श्रीराम की भक्ति में रंग जाएं। जय श्रीराम! ????????

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