कब रे मिलोगे राम मन बावरा पुकारे सुबहो शाम लिरिक्स

जब हृदय श्रीराम की भक्ति में पूर्णतः समर्पित हो जाता है, तो हर पल, हर क्षण बस उनके दर्शन की अभिलाषा बनी रहती है। कब रे मिलोगे राम, मन बावरा पुकारे सुबह-शाम भजन इसी गहरी तड़प और प्रेम को व्यक्त करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे प्रेम और समर्पण से की गई पुकार कभी व्यर्थ नहीं जाती—प्रभु श्रीराम अवश्य भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और अपने प्रेम से उन्हें कृतार्थ करते हैं। आइए, इस भजन के माध्यम से अपने मन को श्रीराम की भक्ति में और अधिक डुबो दें।

Kab Re Miloge Ram Man Bavara Pukare Subaho Sham

कब रे मिलोगे राम,
मन बावरा पुकारे
सुबहो शाम,
कब रे मिलोगें राम।।

रात अंधेरी कछु,
सूझत नाहीं
जियरा मोरा,
बस में नाहीं
अब तो अंतर प्यास,
बुझा दो मेरे राम
मन बावरा पुकारे,
सुबहो शाम,
कब रे मिलोगें राम।।

अखियां हरदम,
राह तकत हैं
जिह्वा तुमरो,
नाम जपत है
कौन गली ढूंढूं,
तुमको घनश्याम
मन बावरा पुकारे,
सुबहो शाम,
कब रे मिलोगें राम।।

हियरा मोरा,
पल पल कांपत
मन विह्वल,
तुमको पुकारत
अब तो हो गयी मेरे,
जीवन की शाम
मन बावरा पुकारे,
सुबहो शाम,
कब रे मिलोगें राम।।

इन नैनन यह,
बान परी है
तेरा दरस चाहें,
हर घड़ी है
विपदा से आन,
उबारो मेरे सुख धाम
मन बावरा पुकारे,
सुबहो शाम
कब रे मिलोगें राम।।

कब रे मिलोगे राम,
मन बावरा पुकारे
सुबहो शाम,
कब रे मिलोगें राम।।

श्रीराम की भक्ति में जो तड़प होती है, वही भक्त को उनसे जोड़ने का सेतु बनती है। कब रे मिलोगे राम, मन बावरा पुकारे सुबह-शाम भजन हमें यह एहसास कराता है कि जब तक हमारे हृदय में श्रीराम की भक्ति की प्यास नहीं जगेगी, तब तक उनकी कृपा का सच्चा अनुभव नहीं होगा। प्रभु राम की इस दिव्य अनुभूति को और गहराई से पाने के लिए श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, राम नाम का जप लूं राम, अगर राघव के चरणों में जगह थोड़ी सी मिल जाए, राम बिना कुछ भाया ना

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