चाहे तार दे हरि चाहे मार दे हरि भजन लिरिक्स

चाहे तार दे हरि चाहे मार दे हरि यह भजन भगवान श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण की भावना को प्रकट करता है। इसमें भक्त भगवान से न केवल जीवन की सुख-शांति की कामना करता है, बल्कि अगर उनकी इच्छा हो तो वह कष्ट भी स्वीकार करने को तैयार रहता है। यह भजन यह संदेश देता है कि सच्चा भक्त भगवान की कृपा पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि वह अपनी स्थिति के प्रति पूर्ण समर्पित होता है। चाहे भगवान उसे सुख दें या दुःख, भक्त केवल उनकी इच्छाओं के अनुसार अपना जीवन जीने को तैयार रहता है।

Chahe Taar De Hari Chahe Maar De Hari

अर्जी है तुमसे सौ सौ बार हे हरी,
बिन पग धोये ना करिहों गंगा पार हे हरी
चाहे तार दे हरि चाहे मार दे हरि,
चाहे तार दो हरी चाहे मार दो हरी।।

गौतम ऋषि की नारी अहिल्या,
चरण छुअत से तारी
कृपा करो ये रोजी मेरी,
काठ की नाव हमारी
एहि नइया से पल रह्यो है,
परिवार हे हरी
बिन पग धोये ना करिहों गंगा पार हे हरी,
चाहे तार दो हरी चाहे मार दो हरी।।

केवट प्रभु के चरण धूल के,
चरणामृत पी डारी
नइया में बिठाया प्रभु को,
गंगा पार उतारी
का दैहों उतराई,
सोच विचार में हरि
बिन पग धोये ना करिहों गंगा पार हे हरी,
चाहे तार दो हरी चाहे मार दो हरी।।

हीरा जड़ी अंगुठी प्रभु को,
दीनी सीता माई
ये लो केवट भइया,
आज अपनी उतराई
अबकी बार ना लैहों,
लौटते मे दैदिहों उसपार हे हरी
बिन पग धोये ना करिहों गंगा पार हे हरी,
चाहे तार दो हरी चाहे मार दो हरी।।

दशरथ नन्दन हे रघुराई,
आप ही नाव चलैया
सारे जग के पालन हारे,
आप हो पार लगैया
आवें हम द्वार तिहारे,
उतारिहों तुम पार हे हरी
बिन पग धोये ना करिहों गंगा पार हे हरी,
चाहे तार दो हरी चाहे मार दो हरी।।

अर्जी है तुमसे सौ सौ बार हे हरी,
बिन पग धोये ना करिहों गंगा पार हे हरी
चाहे तार दे हरि चाहे मार दे हरि,
चाहे तार दो हरी चाहे मार दो हरी।।

चाहे तार दे हरि चाहे मार दे हरि भजन एक गहरे और सच्चे भक्ति भाव को प्रकट करता है, जिसमें भगवान की इच्छा के आगे भक्त का खुद का कोई स्वार्थ नहीं होता। श्रीराम के भजनों में यह भावना बार-बार देखने को मिलती है, जैसे राम के गीत सुनाते चलो में हम देखते हैं कि राम का नाम ही आत्मिक शांति और समर्पण की पराकाष्ठा है। श्रीराम की भक्ति और उनके भजनों में ही हमारी जीवन की सच्ची सफलता छिपी है, यही भजन हमें याद दिलाता है कि भगवान की इच्छा में ही सब कुछ निहित है। जय श्रीराम!

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