बिना रघुनाथ को देखे नहीं दिल को करारी है लिरिक्स

बिना रघुनाथ को देखे नहीं दिल को करारी है एक अत्यंत भावनात्मक भजन है, जिसमें भक्त अपने दिल की गहरी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। इसमें भगवान श्रीराम की उपस्थिति और दर्शन की महत्वता को बताया गया है। भजन में यह बताया गया है कि जब तक रघुनाथ का दर्शन नहीं हो जाता, तब तक दिल को सुकून नहीं मिलता। हर शख्स का दिल तभी शांति से भर सकता है जब वह श्रीराम के दर्शन करता है और उनके नाम का जाप करता है।

Bina Raghunath Ko Dekhe Nahi Dil Ko Karari Hai

बिना रघुनाथ को देखे,
नहीं दिल को करारी है
हमारी मात की करनी,
सकल दुनिया से न्यारी है
बिना सियाराम को देखे,
नहीं दिल को करारी है।।

लगी रघुवंश में अग्नि,
अवध सारी उजाड़ी है
विमुख श्री राम से कीन्हा,
ऐसी जननी हमारी है
बिना सियाराम को देखे,
नहीं दिल को करारी है।।

सुना जब तात का मरना,
मानो बरछी सी मारी है
भरत सिरमौर धरनी में,
यही कहता पुकारी है
बिना सियाराम को देखे,
नहीं दिल को करारी है।।

बड़ा व्याकुल हुआ बेसुध,
नयन से नीर जारी है
पडूँ रघुनाथ चरणों में,
यही ‘तुलसी’ विचारी है
बिना सियाराम को देखे,
नहीं दिल को करारी है।।

बिना रघुनाथ को देखे,
नहीं दिल को करारी है
हमारी मात की करनी,
सकल दुनिया से न्यारी है
बिना सियाराम को देखे,
नहीं दिल को करारी है।।

बिना रघुनाथ को देखे नहीं दिल को करारी है भजन हमें यह सिखाता है कि हमारे जीवन का उद्देश्य सिर्फ श्रीराम के चरणों में समर्पण है। राम के दर्शन से ही जीवन की राह स्पष्ट होती है। इस भजन के माध्यम से हम राम की उपस्थिति महसूस कर सकते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन को सुखमय बना सकते हैं। जैसे राम के गुणों का गान हमें जीवन को सहज और शांतिपूर्ण बनाने में मदद करता है, वैसे ही श्रीराम की भक्ति हमारे दिल को शांति देती है। राम के भजन के साथ हर कार्य में आनंद और समृद्धि आती है। जय श्रीराम!

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