मन भाये सखी री सिया के सजना लिरिक्स

मन भाये सखी री सिया के सजना भजन भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रेम और सौंदर्य का चित्रण करता है। यह भजन एक भक्त की भावनाओं को व्यक्त करता है, जो भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करता है। इस भजन में सीता माता के साथ श्रीराम के प्रेम की गाथा है, जिसमें उनके मिलन और एक-दूसरे के प्रति असीम श्रद्धा को देखा जाता है। यह भजन हमें एक साथ प्रेम, भक्ति और समर्पण की भावना को महसूस कराता है।

Man Bhaye Sakhi Ri Siya Ke Sajana

सांवली सूरत मोहनी मूरत,
मोहत मन रतनारे नयना
मन भायें सखी री,
सिया के सजना।।

सिर पर मौर झालरी शोभे,
जेवर अंग सजायो सजना
मन भायें सखी री,
सिया के सजना।।

मलय तिलक शुचि सुभग सुहावन,
रुचिर अलक्त रचायो चरना
मन भायें सखी री,
सिया के सजना।।

अगणित कामदेव छवि राजत,
शोभित आज जनक अंँगना
मन भायें सखी री,
सिया के सजना।।

मैया इनिके सुभग सुहासिन,
खीर खाइ जनमायो ललना
मन भायें सखी री,
सिया के सजना।।

ब्रह्मेश्वर प्रभु चरन सरन है,
उन बिनु इक पल है कल ना
मन भायें सखी री,
सिया के सजना।।

मन भाये सखी री सिया के सजना भजन हमें श्रीराम और सीता माता के परम प्रेम का अहसास कराता है। यह भजन उनकी दिव्य जोड़ी को प्रतिष्ठित करता है और हमें उनकी भक्ति में लीन होने का आह्वान करता है। इस भजन के माध्यम से हम राम के चरणों में समर्पण और सीता राम के प्रेम की महिमा का अनुभव कर सकते हैं। श्रीराम के भजनों में शक्ति और शांति का अनुभव होता है, जो हमारे जीवन को और अधिक सार्थक बनाता है। जय श्रीराम!

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