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जहाँ जिनकी जटाओं में गंगा की बहती अविरल धारा लिरिक्स

भगवान शिव की जटाओं से प्रवाहित होने वाली पावन गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्ष का द्वार है। जहाँ जिनकी जटाओं में गंगा की बहती अविरल धारा भजन में शिवजी की इस दिव्यता और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। यह भजन हमें उनकी असीम शक्ति, करुणा और सृष्टि के कल्याण के प्रति उनके प्रेम का एहसास कराता है। आइए, इस भजन के माध्यम से महादेव की महिमा का गुणगान करें।

Jahan jinki Jatav Mein Ganga Ki bahti Aviral Dhara

जहाँ जिनकी जटाओं में गंगा की
बहती अविरल धारा,
अभिनन्दन उन्हें हमारा
अभिनन्दन उन्हें हमारा,
जिनके त्रिनेत्र ने कामदेव को,
एक ही पल मारा
अभिनन्दन उन्हें हमारा,
अभिनन्दन उन्हें हमारा।।

भीक्षुक बनकर डोले वन वन वो
विषवेम्बी कहलाए,
देवों को दे अमृत घट वो
खुद काल कुट पि जाए,
खुद काल कुट पि जाए
नर मुंडो कि माला को जिसने,
अपने तन पर धारा
अभिनन्दन उन्हें हमारा,
अभिनन्दन उन्हें हमारा।।

विषधर सर्पों को धारण कर
रखा है अपने तन पर,
दीनों के बंधु दया सदा
करते है अपने जन पर,
करते है अपने जन पर
देते हे उनको सदा सहारा,
जिसने उन्हें पुकारा,
अभिनन्दन उन्हें हमारा
अभिनन्दन उन्हें हमारा।।

राघव की अनुपम भक्ति जिनके
जीवन की आशाएं,
सतसंग रुपी सुमनों से
सारी धरती को महकाए,
सारी धरती को महकाए
ज्ञानी भी जिनकी गूढ़ महिमा का,
पा ना सके किनारा
अभिनन्दन उन्हें हमारा,
अभिनन्दन उन्हें हमारा।।

जहाँ जिनकी जटाओं में गंगा की
बहती अविरल धारा,
अभिनन्दन उन्हें हमारा
अभिनन्दन उन्हें हमारा,
जिनके त्रिनेत्र ने कामदेव को,
एक ही पल मारा
अभिनन्दन उन्हें हमारा,
अभिनन्दन उन्हें हमारा।।

भगवान शिव की जटाओं में बहती गंगा हमें जीवन की पवित्रता और शुद्धि का संदेश देती है। उनकी महिमा को और गहराई से जानने के लिए भोलेनाथ तुम्हारा भोलापन, शिव ने श्रृंगार किया है गौरा क्या बाकी, भोले शंकर हम भक्तों से करते कितना प्यार, और “ओ शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे” जैसे अन्य भजनों को भी पढ़ें और शिवजी की भक्ति में रम जाएं। ????????

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