अपने दरबार में तू बुलाले — यह भजन भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने की विनती है। जब संसार के मोह और कष्ट हमें घेर लेते हैं, तब केवल महादेव का दरबार ही वह स्थान होता है जहाँ आत्मा को शांति मिलती है। यह भजन एक भक्त की पुकार है कि भोलेनाथ उसे अपने पावन दरबार में बुलाएँ और उसे अपने आशीर्वाद से मालामाल करें। आइए, इस भजन के भावपूर्ण शब्दों के माध्यम से महादेव की भक्ति में लीन होते हैं।
Apne Darbar Me Tu Bulale
महाकाल बाबा उज्जैन वाले,
जीवन मेरा तेरे हवाले,
दर दर भटका पड़ गए छाले,
मुझको तू उज्जैन बुलाले,
मैं तो ना जाऊँ किसी दर पे,
तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले,
अपने दरबार में तू बुलाले,
तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले,
अपने दरबार में तू बुलालें।1।
साँचा दरबार है करलो दीदार है,
बेल पत्री तू आके चढ़ा दे,
तेरी झोली भरे हाथ सर पर धरे,
बात दिल की तू इनको सुना दे,
सब भक्तो का काम किया है,
किस्मत से भी ज्यादा दिया है,
मैं तो ना जाऊँ किसी दर पे,
तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले,
अपने दरबार में तू बुलालें।2।
ये दयावान है ऐसे भगवान है,
तीनो लोको में इन सा ना दानी,
देव के देव है ये महादेव है,
इनकी ताकत को सबने है मानी,
इनके चरण का हो जा दीवाना,
मिल जाएगा तुझको ठिकाना,
मैं तो ना जाऊँ किसी दर पे,
तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले,
अपने दरबार में तू बुलालें।3।
सुनो उज्जैन के वासी,
काट दो यम की अब फांसी,
तुम्हारा नाम गाता हूँ,
तुम्हे हर पल मनाता हूँ,
बैठ नंदी पर अब आओ,
साथ में गौरा को लाओ,
‘प्रेमी’ की झोलिया भरना,
आज देरी नही करना,
तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले,
अपने दरबार में तू बुलालें।4।
महाकाल बाबा उज्जैन वाले,
जीवन मेरा तेरे हवाले,
दर दर भटका पड़ गए छाले,
मुझको तू उज्जैन बुलाले,
मैं तो ना जाऊँ किसी दर पे,
तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले,
अपने दरबार में तू बुलाले,
तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले,
अपने दरबार में तू बुलालें।5।
शिव के दरबार में जिसे बुलावा आ जाता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। महादेव के चरणों में समर्पण ही सच्ची भक्ति है। यदि यह भजन आपके हृदय को शिवमय कर गया, तो भोले के हाथों में है भक्तों की डोर, शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं, कैसे दर आऊं मैं तेरे दरश पाने को, और जिसकी लागी लगन भोलेनाथ से जैसे अन्य शिव भजनों को भी अवश्य पढ़ें और भोलेनाथ की भक्ति में रम जाएँ। हर हर महादेव! ????????

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile