जब भक्त को कन्हैया का सानिध्य मिल जाता है, तो उसके जीवन में एक अनोखी दिव्यता आ जाती है। जबसे कन्हैया ने मुझे अपनाया है भजन इसी आत्मीय अनुभव को प्रकट करता है, जहाँ भक्त यह महसूस करता है कि कान्हा की कृपा से उसके जीवन की हर पीड़ा समाप्त हो गई है और उसका हृदय प्रेम व आनंद से भर गया है। आइए, इस भजन को पढ़ें और कान्हा के प्रेम में डूबकर उनकी कृपा का अनुभव करें।
Jab Se Kanhaiya Ne Mujhe Apnaya Hai
जबसे कन्हैया ने,
मुझे अपनाया है,
मेरे संग संग रहता,
सांवरे का साया है,
जब से कन्हैया ने,
मुझे अपनाया है।।1।।
कल तक जो जिंदगी में,
मेरे ख्वाब थे अधूरे,
तेरी दया से बाबा,
वो हो रहे है पूरे,
तूने जब से सिर पे,
हाथों को फिराया है,
जब से कन्हैया ने,
मुझे अपनाया है।।2।।
जीने को जी रहे थे,
पर बात कुछ नहीं थी,
तेरे बिना तो माधव,
औकात कुछ नहीं थी,
दुख में भी सुख का मुझे,
स्वाद चखाया है,
जब से कन्हैया ने,
मुझे अपनाया है।।3।।
तेरे फैसले के आगे,
तकदीर सिर झुकाए,
करता है सांवरा जो,
कोई भी कर ना पाए,
कांटों के बगीचे में,
फूलों को खिलाया है,
जब से कन्हैया ने,
मुझे अपनाया है।।4।।
जबसे कन्हैया ने,
मुझे अपनाया है,
मेरे संग संग रहता,
सांवरे का साया है,
जब से कन्हैया ने,
मुझे अपनाया है।।5।।
कन्हैया की भक्ति का आनंद वही जान सकता है, जिसे उन्होंने अपनाया है। उनकी इस अपार करुणा और प्रेम को किशोरी किशन झूला पर विराजे, आया सावन झूला झूले राधा कुंज बिहारी से, रुत या सावन की आई झूलन पधारो कान्हा बाग में, नंदलाला प्रगट भये आज बिरज में लड्डूवा बंटे जैसे अन्य भजनों में भी अनुभव किया जा सकता है। आइए, इन भजनों को भी पढ़ें और श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर उनके प्रेम और आशीर्वाद का अनुभव करें। जय श्री कृष्ण! ????????