रुत या सावन की आई झूलन पधारो कान्हा बाग में

सावन का महीना भक्तों के लिए विशेष आनंद और उत्साह लेकर आता है, खासकर जब श्रीकृष्ण झूलन उत्सव में अपने प्रेम से भक्तों को निहाल करते हैं। रुत या सावन की आई, झूलन पधारो कान्हा बाग में भजन इसी मधुर भावना को प्रकट करता है, जहाँ भक्त श्रीकृष्ण से आग्रह करता है कि वे आकर बाग में झूला झूले और अपने मधुर दर्शन से सभी को कृतार्थ करें। आइए, इस भजन को पढ़ें और सावन के इस पावन अवसर पर श्रीकृष्ण की झूलन लीला का आनंद लें।

Rut Ya Sawan Ki Aayi Jhulan Padharo Kanha Bag Me

रुत या सावन की आई,
राधा झूलो घलवाई,
झूलन पधारो कान्हा बाग में,
ओ कान्हा,
झूलन पधारो कान्हा बाग में।।1।।

मलियागरी को कान्हा,
पलणों बणवायो हो,
पलणों बणवायो,
डोरी रेशम री गुंथी,
हिण्डो घलवायो हो,
हिण्डो घलवायो,
रुक्मण सत्यभामा आई,
झूलन ने कृष्ण कन्हाई,
इब तो पधारो कान्हा बाग में।।2।

बिजली कड़के बादल में,
सावन यो बरसे हो,
सावन यो बरसे,
थारे सु मिलवा पाणी,
आँखड़ली बरसे हो,
आँखड़ली बरसे,
भीजे चुनरिया म्हारी,
पायल बिछिया भी सारी,
इब तो पधारो कान्हा बाग में।।3।

काजल टिकी हाथां में,
मेहँदी रचाई हो,
मेहँदी रचाई,
गोरी बईयां में हरी हरी,
चूड़ी पहराई हो,
चूड़ी पहराई,
खिल रही देखो फुलवारी,
चंपा चमेली प्यारी,
इब तो पधारो कान्हा बाग में।।4।

हेलो सुणकर राधा को,
कानूड़ो आयो हो,
कानूड़ो आयो,
झूले झुलावे मोहन,
रास रचायो हो,
रास रचायो,
झूले वृन्दावन सारो,
करके सरिता मन म्हारो,
बेगा पधार्या कान्हा बाग में।।5।

रुत या सावन की आई,
राधा झूलो घलवाई,
झूलन पधारो कान्हा बाग में,
ओ कान्हा,
झूलन पधारो कान्हा बाग में।।6।

राधा-कृष्ण का झूलन उत्सव प्रेम और भक्ति से भरा होता है, और इसे अनुभव करने से मन भक्तिरस में सराबोर हो जाता है। उनकी इस मधुर झूलन लीला को किशोरी किशन झूला पर विराजे, आया सावन झूला झूले राधा कुंज बिहारी से, श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम, राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी जैसे अन्य भजनों में भी अनुभव किया जा सकता है। आइए, इन भजनों को भी पढ़ें और ठाकुर जी की भक्ति में मग्न होकर अपने मन को भक्तिमय बनाएं। जय श्री राधे-कृष्ण! ????????

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