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वृन्दावन में मैं चला आया

वृन्दावन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण की भक्ति और प्रेम का दिव्य धाम है। जब कोई भक्त वृन्दावन में मैं चला आया जैसे भजन का स्मरण करता है, तो उसके मन में कृष्ण की लीलाओं की मधुर छवि सजीव हो उठती है। यह भजन हमें श्रीकृष्ण की उपस्थिति का अनुभव कराता है और हमें उनके प्रेम में डूबने के लिए प्रेरित करता है, मानो हम स्वयं वृन्दावन की पावन गलियों में विचरण कर रहे हों।

Vrindavan Me Main Chala Aaya

वृन्दावन में मैं चला आया,
बांके बिहारी ने मुझको बुलाया,
याद मुझे ये गलियां आई,
याद मुझे ये गलियां आई,
कुंज गलीन में खींचा चला आया,
वृंदावन में मैं चला आया,
बांके बिहारी ने मुझको बुलाया।।1।।

ब्रज भूमि की बात निराली,
दिन है निराला रात निराली,
राधे राधे नाम उचारे,
पत्ता पत्ता डाली डाली,
पत्ता पत्ता डाली डाली,
संतो ने जहां पर कृष्ण को पाया,
कुंज गलीन में खींचा चला आया,
वृंदावन में मैं चला आया,
बांके बिहारी ने मुझको बुलाया।।2।

देवता जिस रस को तरसे,
वो रस वृंदावन में बरसे,
पागल श्याम के हो जाओगे,
सोच समझकर चलना घर से,
सोच समझकर चलना घर से,
श्याम ने जहां पर रास रचाया,
कुंज गलीन में खींचा चला आया,
वृंदावन में मैं चला आया,
बांके बिहारी ने मुझको बुलाया।।3।

वृन्दावन में मैं चला आया,
बांके बिहारी ने मुझको बुलाया,
याद मुझे ये गलियां आई,
याद मुझे ये गलियां आई,
कुंज गलीन में खींचा चला आया,
वृंदावन में मैं चला आया,
बांके बिहारी ने मुझको बुलाया।।4।

वृन्दावन जाने का सौभाग्य हर भक्त का सपना होता है, क्योंकि वहीं श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा का अनुभव किया जा सकता है। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे “जय जय हो प्यारे नंदलाल की जय बोलो गोपाल की”, “ब्रज की गली गली में शोर आयो आयो माखन चोर”, “कृष्ण कन्हैया तुम्हे आना होगा मुरली मधुर बजाना होगा” और “मोहे लागी लगन राधा वल्लभ से”, ताकि आपके मन में भी वृन्दावन जैसा भक्तिरस उमड़ पड़े। ????????

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