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मोहे लागी लगन राधा वल्लभ से

जब भक्ति प्रेम का स्वरूप धारण कर लेती है, तब मन और आत्मा पूरी तरह से अपने आराध्य में विलीन हो जाते हैं। भजन मोहे लागी लगन राधा वल्लभ से भक्त के उसी प्रेमपूर्ण समर्पण को दर्शाता है, जहां आत्मा केवल श्रीकृष्ण के चरणों में ही आनंद अनुभव करती है। यह भजन प्रेम, भक्ति और श्रीकृष्ण की मधुर लीलाओं में डूब जाने की प्रेरणा देता है, जो भक्तों को राधारानी की भक्ति से जोड़ता है।

Mohe Lagi Lagan Radha Vallabh Se

दोहा –
श्री राधा वल्लभ रूप रस,
करहू नैन मग पान,

प्रेम सहित निजु केली गुन,
करी रसना दिन गान।।1।।

मोहे लागी लगन राधा वल्लभ से,
अब संभाले संभलता ना मोरा जिया,
अब संभाले संभलता ना मोरा जिया,
मोरे नैना लड़े राधावल्लभ से,
मोरे बस में रहा ना मोरा जिया,
मोहे लागी लगन राधावल्लभ से।।2।।

जब मेरी अंखियां तुमको निहारे,
बन बैठे तुम नैनो के प्यारे,
अब तो कह दो तुम हो हमारे,
राधावल्लभ तुम हो हमारे,
बिन बोले तूने सब है किया,
किस्मत से ज्यादा ही दिया,
मोहे लागी लगन राधावल्लभ से,
अब संभाले संभलता ना मोरा जिया।।3।।

चारो दिशाएं महक उठी है,
फैली है खुशबू की फुहार,
चांद सा दूल्हा बन बैठा है,
राधावल्लभ जी सरकार,
मैं तो निहारू एक टक तुमको,
तेरी अखियों ने जादू किया,
मोहे लागी लगन राधावल्लभ से,
अब संभाले संभलता ना मोरा जिया।।4।।

मोहे लागी लगन राधावल्लभ से,
अब संभाले संभलता ना मोरा जिया,
अब संभाले संभलता ना मोरा जिया,
मोरे नैना लड़े राधावल्लभ से,
मोरे बस में रहा ना मोरा जिया,
मोहे लागी लगन राधावल्लभ से।।5।।

जब श्रीकृष्ण का नाम हृदय में बस जाता है, तब सांसारिक बंधन अर्थहीन हो जाते हैं और भक्ति ही एकमात्र सत्य प्रतीत होती है। ऐसे ही दिव्य भजनों को पढ़ें और करें, जैसे भज गोविन्दम भज गोपाला भजले बन्दे हरि हरि, आना आना ओ कन्हैया मेरे हृदय में आ जाना, जय राधे जय कृष्णा जय हो वृंदावन और ब्रज की गली गली में शोर, आयो आयो माखन चोर, ताकि आपकी भक्ति और अधिक गहरी हो सके। ????????

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