जब भक्त के जीवन में श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रकाश फैलता है, तो उसका भाग्य भी दिव्यता से आलोकित हो जाता है। भजन जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई, मेरे तो भाग्य उजागर है इस भावना को प्रकट करता है कि जब से नंदलाल इस धरती पर आए, तब से समस्त संसार धन्य हो गया। यह भजन भक्तों के मन में श्रीकृष्ण के जन्म का आनंद और उनके आगमन से मिली अपार कृपा का एहसास कराता है।
Jabse Janme Krishna Kanhai Mere To Bhagya Ujagar Hai
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर है,
भाग्य उजागर है मेरे तो,
नटवर नागर है,
जबसे जन्में कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर है।।1।।
नंद के घर में बजी बधाई,
झूम रहे सब ग्वाले,
कंस के काराग्रह के कान्हा,
तोड़ दिए सब ताले,
यशोदा मैया झूम के बोली,
मेरो तो मुरली मनोहर है,
जबसे जन्में कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर है।।2।।
तीन लोक के स्वामी जन्मे,
मंद मंद मुस्काए,
बन के औघड़ शिव शंकर जी,
दर्शन करने आए,
नजर उतारे यशोदा मैया,
कन्हैया कितनो सुंदर है,
जबसे जन्में कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर है।।3।।
कान्हा तेरी सूरत पर है,
ये दुनिया बलिहारी,
हम सब पर भी किरपा करना,
मेरे श्याम बिहारी,
‘वसुंधरा’ करती है विनती,
की दोनों हाथ जोड़कर है,
जबसे जन्में कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर है।।4।।
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर है,
भाग्य उजागर है मेरे तो,
नटवर नागर है,
जबसे जन्में कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर है।।5।।
श्रीकृष्ण का जन्म हर भक्त के लिए जीवन में नया उजाला लेकर आता है। जब हम उनकी भक्ति में डूबते हैं, तो हमारा भाग्य भी संवर जाता है। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे ब्रज की गली गली में शोर, आयो आयो माखन चोर, आया है घर नंद का लाल, मिलकर थाल बजाओ जी, कृष्ण कन्हैया तुम्हें आना होगा, मुरली मधुर बजाना होगा और आना आना ओ कन्हैया, मेरे हृदय में आ जाना, जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और भी गहरी हो जाए। ????????