चाहे बना दो, चाहे मिटा दो —यह भजन कृष्ण भक्ति की अटूट समर्पण भावना को प्रकट करता है। जब एक भक्त स्वयं को श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर देता है, तब वह अपने अस्तित्व की परवाह नहीं करता। प्रभु जो भी करेंगे, वह उनकी कृपा ही होगी—यही भाव इस भजन में प्रकट होता है। श्रीकृष्ण के प्रति यह निस्वार्थ प्रेम और समर्पण ही सच्ची भक्ति की पहचान है।
Chahe Bana Do Chahe Mita Do
चाहे बना दो चाहे मिटा दो,
नहीं छोडूं तेरा हाथ रे,
मेरे मन की तुम सब जानो,
कैसे मेरे हालात रे,
तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं हूँ,
कैसे कहूं मेरे नाथ रे,
देर ना लगाओ,
आ जाओ रे सांवरिया,
ढूंढ रही है तुम्हें,
कब से ये अंखियां,
मेरी विनती सुनो,
मेरी पीड़ा हरो,
प्यारे श्याम मेरे दर्शन दे,
देर ना लगाओ,
आ जाओ रे सांवरिया।।1।।
तुमसे बंधी है प्रीत की डोरी,
तुम ही मेरे सरकार रे,
छूटे चाहे रिश्ते नाते,
नहीं छूटे तेरा हाथ रे,
जपता रहूं मैं नाम तुम्हारा,
दो इतनी सौगात रे,
दरस दिखाओ,
आ जाओ रे कन्हैया,
ढूंढ रही है तुम्हें,
कब से ये अखियां,
तेरे चरण दबाऊं,
तुम्हें पालना झुलाऊं,
प्यारे श्याम मेरे दर्शन दे,
देर ना लगाओ,
आ जाओ रे सांवरिया।।2।।
देर ना लगाओ,
आ जाओ रे सांवरिया,
ढूंढ रही है तुम्हें,
कब से ये अंखियां,
मेरी विनती सुनो,
मेरी पीड़ा हरो,
प्यारे श्याम मेरे दर्शन दे,
देर ना लगाओ,
आ जाओ रे सांवरिया।।3।।
श्रीकृष्ण की महिमा अनंत है, उनकी कृपा अपार है। जब हम खुद को उनके चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो हमारा जीवन शांत, सरल और आनंदमय हो जाता है। यदि यह भजन आपके मन में भक्ति का दीप जलाने में सफल रहा, तो मेरे गिरधर मेरे मोहन मुझे तेरा सहारा है, नैन मिले जो गिरधर से हो जाता है उद्धार और मेरो मन वृंदावन में अटको जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य करें और श्रीकृष्ण प्रेम में रंग जाएं। जय श्रीकृष्ण! ????????✨