मेरो मन वृंदावन में अटको —यह भजन उस गहरी भक्ति और प्रेम का प्रतीक है, जब भक्त का मन श्री कृष्ण की लीलाभूमि वृंदावन में रम जाता है। वृंदावन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है, जहाँ कृष्ण की छवि हर कण-कण में बसती है। जब प्रेम और भक्ति चरम पर होती है, तो मन संसार की उलझनों से मुक्त होकर केवल श्री बांके बिहारी के चरणों में अटक जाता है।
Mero Man Vrindavan Mein Atko
मेरो मन वृंदावन में अटको,
मेरो मन हरिचरणन में अटको,
बनके जोगन डोलत ब्रज में,
बन के जोगन डोलत ब्रज में,
पीवत यमुना जल को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको,
मेरो मन हरिचरणन में अटको।।1।।
मेरो मुझ में कुछ ना मोहन,
तेरी मिट्टी तेरो कण कण,
मेरो मुझ में कुछ ना मोहन,
तेरी मिट्टी तेरो कण कण,
वृंदावन की कुंज गलिन में,
वृन्दावन की कुंज गलिन में,
मिल जाओ प्रभु मुझको,
मेरो मन वृन्दावन में अटको,
मेरो मन हरिचरणन में अटको।।2।।
इस जोगन के तुम हो साजन,
करना है सब आत्म समर्पण,
इस जोगन के तुम हो साजन,
करना है सब आत्म समर्पण,
अंत समय आनंद मिले मोहे,
अंत समय आनंद मिले मोहे,
बस वेणु के रस को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको,
मेरो मन हरिचरणन में अटको।।3।।
याद में तोरी भई बावरी,
सुध लो मोरी कुंज बिहारी,
याद में तोरी भई बावरी,
सुध लो मोरी कुंज बिहारी,
अब आओ मेरे प्राण पियारे,
अब आओ मेरे प्राण पियारे,
अपनाओ या जन को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको,
मेरो मन हरिचरणन में अटको।।4।।
मेरो मन वृंदावन में अटको,
मेरो मन हरिचरणन में अटको,
बनके जोगन डोलत ब्रज में,
बन के जोगन डोलत ब्रज में,
पीवत यमुना जल को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको,
मेरो मन हरिचरणन में अटको।।5।।
जब मन वृंदावन में रम जाए, तो श्री कृष्ण की कृपा से जीवन आनंदमय हो जाता है। यदि यह भजन आपको अच्छा लगा, तो नैनो की प्यास बुझा दे रे मेरे बांके बिहारी , तेरे ही बदौलत सांवरे परिवार है मेरा , और पकड़ ली है मेरी कलाई प्रभु ने जैसे भजनों को भी अवश्य करें और श्री कृष्ण प्रेम में खो जाएं। जय श्री राधे कृष्ण! ????????✨