हर बार कुछ गजब सा दरबार श्याम का —यह भजन बाबा श्याम के भव्य दरबार और उसमें होने वाली दिव्यता का सुंदर वर्णन करता है। जब भी भक्त श्याम बाबा के दरबार में आते हैं, वे एक नई अनुभूति से भर जाते हैं। बाबा का आशीर्वाद, दरबार की रौनक, भक्तों की श्रद्धा और प्रेम—सब कुछ अद्भुत होता है। यह भजन श्याम बाबा के चमत्कारी दरबार और उसकी अलौकिकता का गुणगान करता है।
Har Bar Kuch Gajab Sa Darbar Shyam Ka
हर बार कुछ गजब सा,
दीखता है कुछ अलग सा,
दरबार श्याम का,
दरबार श्याम का।।1।।
देखो कोई खड़ा है,
हाथों में चवर लेके,
कोई पीछे है खड़ा,
एकटक श्याम को देखे,
धुलता है प्रेमियों के,
कभी प्रेम आंसुओं से,
दरबार श्याम का,
दरबार श्याम का।।2।।
किस्मत सजाने वाला,
खुद पहले सज रहा है,
जरा गौर से तो देखो,
क्या खूब लग रहा है,
कभी श्वेत कभी पीला,
सतरंग कभी हरा है,
दरबार श्याम का,
दरबार श्याम का।।3।।
बजते है चंग जमके,
होता गजब नजारा,
बनते है काम सबके,
लगता है जब अखाडा,
जो सोच तुम रहे हो,
उससे कई बड़ा है,
दरबार श्याम का,
दरबार श्याम का।।4।।
हर बार कुछ गजब सा,
दीखता है कुछ अलग सा,
दरबार श्याम का,
दरबार श्याम का।।5।।
श्याम बाबा का दरबार हर बार एक नई छटा बिखेरता है, जहाँ श्रद्धा और भक्ति की गंगा प्रवाहित होती है। यदि यह भजन आपको अच्छा लगा, तो बैठे बैठे खाटू में ओ सांवरे , खाटू में रंगों की बौछार है , और तेरे दरबार आए हैं जहाँ से हार आए हैं जैसे भजनों को भी अवश्य करें और श्याम प्रेम में लीन हो जाएं। जय श्री श्याम! ????????✨