दर्शन का हूँ अभिलाषी

दर्शन का हूँ अभिलाषी —यह भजन एक भक्त की गहरी तड़प और श्रद्धा को व्यक्त करता है। जब मन श्याम बाबा के चरणों में समर्पित हो जाता है, तो उनके दिव्य दर्शन की अभिलाषा प्रबल हो जाती है। यह भजन हर उस भक्त की भावना को दर्शाता है, जो खाटू नरेश के दर्शन के लिए आतुर रहता है और उनकी कृपा की छांव में शरण लेना चाहता है।

Darshan Ka Hun Abhilashi

जब से तेरे द्वार पे आया,
एक सुकून मिला,
दिल ये जिसे ढूंढता आया,
वो वजूद मिला,
छाए जब बादल ग़म के,
तुझे याद किया,
साँवरिया,
हारे जब सारे जग से,
तूने साथ दिया,
बाबा मैं हूँ दास तेरा,
दर्शन का हूँ अभिलाषी,
बाबा अब बुझा दो ना,
नैनों की ये प्यास हमारी।।1।।

जो भी तेरे खाटू गया,
बिन माँगे बाबा,
सब कुछ है पाया,
पाई ख़ुशी दर से तेरे,
उनको मिला है,
तेरा सहारा
क्या कुछ ना मिला,
ये जानु मैं जग जाने ना,
बाबा मैं पुकार रहा,
दर्शन दे दो गिरधारी,
बाबा अब बुझा दो ना,
नैनों की ये प्यास हमारी।।2।।

कोई नही था जब मेरा,
तुमने ही हाँथो को,
मेरे थामा,
हाथ फिरा सर पे मेरे,
तुमने मुझे फिर,
दर्शन दिखाया,
फिर हुआ ये कमाल,
ये जानु मैं जग जाने ना,
बाबा क्या है तेरी कृपा,
दुनिया न जाने ये सारी,
बाबा अब बुझा दो ना,
नैनों की ये प्यास हमारी।।3।।

करता ‘विनय’ दास तेरा,
सुन लेना प्रभु इक,
अर्जी हमारी,
खाटू में ही रहना मुझे,
करता रहूँ सदा,
सेवा तुम्हारी,
भक्ति का दो वरदान,
सेवा करूँ जब तक है प्राण
बाबा मैं पुकार रहा,
दर्शन दे दो गिरधारी,
बाबा अब संभालो जरा,
मैं तो हूँ शरण तुम्हारी,
बाबा मैं हूं दास तेरा,
दर्शन का हूँ अभिलाषी,
बाबा अब बुझा दो ना,
नैनों की ये प्यास हमारी।।4।।

श्याम बाबा के दर्शन मात्र से भक्तों के जीवन की हर परेशानी समाप्त हो जाती है और हृदय प्रेम व भक्ति से भर जाता है। उनकी कृपा अपार है, जो भी सच्चे मन से पुकारता है, उसे वह अपने दर्शन अवश्य देते हैं। यदि यह भजन आपको अच्छा लगा, तो बैठे बैठे खाटू में ओ सांवरे , बुलावे म्हारो सांवरो ,और तेरे दरबार आए हैं जहाँ से हार आए हैं जैसे भजनों को भी अवश्य करें और श्याम प्रेम में लीन हो जाएं। जय श्री श्याम! ????????✨

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