जरा प्यार से देख लो तुम मुझे फिर चैन मिल जाए

भक्त और भगवान के बीच का संबंध पूर्णतः आत्मिक होता है, जहाँ एक दृष्टि भर से समस्त कष्टों का निवारण हो सकता है। भजन जरा प्यार से देख लो तुम मुझे, फिर चैन मिल जाए इसी भाव को दर्शाता है कि जब श्रीकृष्ण अपने करुणामय नेत्रों से कृपादृष्टि डालते हैं, तो जीवन की समस्त अशांति समाप्त हो जाती है। यह भजन प्रभु की अनुकंपा की महत्ता को उजागर करता है, जहाँ एक प्रेमपूर्ण दृष्टि से ही भक्त को आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

Zara Pyar Se Dekh Lo Tum Mujhe Fir Chain Mil Jaye

दोहा –
मनमोहन नैना आपके,
नौका के आधार,
जो जन इनमे बस गए,
सो जन है गए पार।

जरा प्यार से देख लो तुम,
मुझे फिर चैन मिल जाए,
बिहारी चैन मिल जाए।।1।।

तेरे नैन कटीले कजरारे,
तेरी बांकी अदा पे मन भटके,
ये भटकन ज़रा अटका दो,
मुझे फिर चैन मिल जाए,
बिहारी चैन मिल जाए।।2।।

मैंने सुना तुम रूप के रसीले,
ब्रज के हो तुम छैल छबीले,
ये रस ज़रा बरसा दो,
मुझे फिर चैन मिल जाए,
बिहारी चैन मिल जाए।।3।।

मैं बरसो से तड़प रही हूँ,
तेरे दीदार को मचल रही हूँ,
एक बार मुझे अपना लो,
मुझे फिर चैन मिल जाए,
बिहारी चैन मिल जाए।।4।।

ज़रा प्यार से देखलो तुम,
मुझे फिर चैन मिल जाए,
बिहारी चैन मिल जाए।।5।।

श्रीकृष्ण की कृपादृष्टि ही भक्तों के लिए परम आनंद का स्रोत होती है, जो जीवन के समस्त दुखों को हर लेती है। उनका प्रेम और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए निरंतर भक्ति और समर्पण आवश्यक है। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे मैं हूँ शरण तिहारी, थोड़ी कृपा दिखाओ ,मेरा दिलदार है साँवरा , दरबार मेरे श्याम का सबको बुला रहा और दर दर भटकने वाले, बाबा से दिल लगाले , जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और भी गहरी हो जाए। ????????

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