जब प्रेम निश्छल और भक्ति अटूट हो, तो हृदय केवल एक ही नाम जपता है—अपने प्रिय साँवरे का। भजन मेरा दिलदार है साँवरा इसी अनन्य प्रेम और समर्पण को दर्शाता है, जहाँ भक्त श्रीकृष्ण को अपने हृदय का स्वामी मानकर उनके प्रेम में डूब जाता है। यह भजन हमें श्रीकृष्ण की मोहक छवि, उनकी लीला और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का अद्भुत अनुभव कराता है। आइए, इस भजन के माध्यम से श्रीश्याम की भक्ति का रस पान करें।
Mera Dildar Hai Sanwara
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार है साँवरा,
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार हैं साँवरा।।1।।
जब से देखा तुझे,
मैं फ़ना हो गया,
तुझसे मिलते ही मैं,
क्या से क्या हो गया,
एक ज़र्रे की थी,
मेरी औक़ात पर,
तूने चाहा तो मैं,
आसमाँ हो गया,
जब से देखी झलक,
फिर ना झपकी पलक,
जुड़ गया तार से तार तेरा मेरा,
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार हैं साँवरा।।2।।
जब से देखी झलक,
मैं दीवाना हुआ,
श्याम चरणों में मेरा,
ठिकाना हुआ,
खुदबखुद मेरी हर बात,
बनने लगी,
जब से खाटू मेरा,
आना जाना हुआ,
अब तो महफ़िल कोई,
हो तेरा ज़िक्र हो,
मेरे होठों पे हरदम है चर्चा तेरा,
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार हैं साँवरा।।3।।
गा के तेरे भजन,
नामवर हो गया,
मेरी माँ की दुआ का,
असर हो गया,
मै हूँ तेरा मेरी,
सारी उलझन तेरी,
तुझपे छोड़ा है,
सब बेफ़िकर हो गया,
सारी दुनिया ने,
बढ़कर लगाया गले,
जब से तुमने है ये हाथ पकड़ा मेरा,
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार हैं साँवरा।।4।।
तेरी भक्ति का,
जब से मिला नूर है,
तबसे जीवन में,
मस्ती भी भरपूर है,
दूर चरणों से अब,
मुझको करना नहीं,
बाक़ी सब मुझको,
साँवरिया मंज़ूर है,
तेरी मर्ज़ी है,
जैसा भी रखना मुझे,
मुझको मंज़ूर है तेरा हर फ़ैसला,
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार हैं साँवरा।।5।।
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार है साँवरा,
साँवरा साँवरा साँवरा,
मेरा दिलदार हैं साँवरा।।6।।
जो भी श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व मान लेता है, उसका जीवन प्रेम, शांति और आनंद से भर जाता है। उनके बिना यह संसार अधूरा लगता है, क्योंकि वही हमारे सच्चे दिलदार हैं। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे दरबार मेरे श्याम का सबको बुला रहा, दर दर भटकने वाले, बाबा से दिल लगाले , दिल श्याम धणी पे डोला दीदार के लिए और सांचा तेरा नाम, तू ही बनाए बिगड़े काम , जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और भी गहरी हो जाए। ????????