देखो रे पहली बार श्याम प्रभु जी भर कर रोये

श्रीकृष्ण, जो हर भक्त के अश्रुओं को पोंछते हैं, स्वयं प्रेम और करुणा से भरकर रो उठें—यह दृश्य भावनाओं से भरा हुआ होगा। भजन देखो रे पहली बार श्याम प्रभु जी भर कर रोये श्रीकृष्ण की गहन भावनाओं को प्रकट करता है, जहाँ वे अपने भक्तों के दुख, प्रेम और समर्पण को देखकर द्रवित हो जाते हैं। यह भजन हमें उनकी करुणा और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का अद्भुत अनुभव कराता है। आइए, इसे पढ़कर श्रीश्याम की भक्ति में डूबें।

Dekho Re Pehli Baar Shyam Prabhu Ji Bhar Kar Roye Lyrics

देखो रे पहली बार,
श्याम प्रभु जी भर कर रोये,
दीन सुदामा के प्रभु ने,
असुवन से पग धोये,
असुवन से पग धोये।।1।।

दुखी सुदामा अति निर्धन था,
वस्त्र फटे थे दुर्बल तन था,
कष्टों से व्याकुल जीवन था,
मगर सहारा एक मोहन था,
चले सुदामा मित्र से मिलने,
चिंताओं में खोए,
दीन सुदामा के प्रभु ने,
असुवन से पग धोये,
असुवन से पग धोये।।2।।

द्वारकाधीश के द्वार पे आए,
भेंट को चावल साथ में लाए,
जब नाम सुदामा अरज कराई,
प्रभु मन प्रीत उमड़ तब आई,
दौड़ के आए गले लगाए,
प्रेम से नैन भिगोए,
दीन सुदामा के प्रभु ने,
असुवन से पग धोये,
असुवन से पग धोये।।3।।

छीन के चावल भोग लगाए,
देख रुक्मणि अचरज लाए,
अनुपम स्वागत हुई बिदाई,
प्रभु की सखा से हुई जुदाई,
घर पहुँचे तो देख के वैभव,
चकित सुदामा होए,
दीन सुदामा के प्रभु ने,
असुवन से पग धोये,
असुवन से पग धोये।।4।।

देखो रे पहली बार,
श्याम प्रभु जी भर कर रोये,
दीन सुदामा के प्रभु ने,
असुवन से पग धोये,
असुवन से पग धोये।।5।।

श्यामसुंदर केवल भक्तों के दुख हरने वाले नहीं, बल्कि उनके भावों से स्वयं को जोड़ने वाले हैं। जब भक्ति निश्छल होती है, तो स्वयं प्रभु भी भाव-विह्वल हो जाते हैं। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे मैं तेरे बिन कुछ भी नहीं , हो जाए तुमसे दिल की बातें , मैं दास गरीब हूँ सांवरिया, कभी मेरे घर भी आ जाना और तेरी दया से चलता गुजारा बाबा हमारा , जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और अधिक गहरी हो जाए। ????????

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