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रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है भजन भगवान श्री विष्णु की सशक्तता और उनके द्वारा सृजी हुई सृष्टि के प्रबंधन को व्यक्त करता है। इस भजन में यह बताया गया है कि सृष्टि की रचना और उसका पालन-पोषण भगवान विष्णु के ही हाथों में है। वे ही इस ब्रह्मांड को रचते हैं, उसे चलाते हैं और उसकी संरचना में हर परिवर्तन करते हैं। यह भजन हमें भगवान के दिव्य कार्यों और उनकी सर्वशक्तिमत्ता का अनुभव करने के लिए प्रेरित करता है, ताकि हम उनकी पूजा और ध्यान में लगे रहें और उनकी कृपा प्राप्त कर सकें।

Rachaai Shrishti Ko Jis Prabhu Ne Vahi Ye Shrishti Chla Rahe Hai

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है
ज पेड़ हमने लगाया पेहले उसी का फल हम अब पा रहे है
रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

इसी धरा से शरीर पाए इसी धरा में फिर सब पाए,
है सत्य नियम यही धरा इक आ रहे है इक जा रहे है
रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

जिहनो ने बेजा जगत में जाना तेह कर दिया लोट कर फिर से आना
जो बेजने वाले है धरा पर वही फिर वापिस बुला रहे है
रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

बैठे है जो धान की बालियो में समाये मेहँदी की लालियो में,
हर ढाल हर पत्ते में समा कर रंग बिरंगे फूल खिला रहे है
रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है भजन भगवान विष्णु की महिमा का उद्घाटन करता है, जो सृष्टि के पालनहार हैं और जिनके हाथों से सारा संसार नियंत्रित होता है। जब हम भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और भक्ति से पूर्ण होते हैं, तो उनका आशीर्वाद हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। इस भक्ति रस को और गहराई से अनुभव करने के लिए आप श्री हरि की महिमा अपार, गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो, नारायण, नारायण जय गोविंद हरे और संकट हरन श्री विष्णु जी जैसे अन्य भजनों का भी पाठ करें और भगवान विष्णु की कृपा का अनुभव करें। ????????

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