प्रभु के चरणों से सच्चा गर प्यार किसी को हो जाये

प्रभु के चरणों से सच्चा गर प्यार किसी को हो जाये भजन में हम भगवान श्रीराम के चरणों में नतमस्तक होकर उन पर विश्वास और प्रेम की गहरी भावना महसूस करते हैं। यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब किसी व्यक्ति को प्रभु के चरणों से सच्चा प्रेम होता है, तो उसका जीवन वास्तव में धन्य और सुखमय हो जाता है। यह भजन हमें प्रभु के प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को प्रगाढ़ बनाने का आह्वान करता है।

Prabhu Ke Charno Se Saccha Gar Pyar Kisi Ko Ho Jaye

प्रभु के चरणों से सच्चा गर,
प्यार किसी को हो जाये,
दो चार शहर की बात ही क्या,
संसार उसी का हो जाये।1।

रावण ने राम से बैर किया,
उसे अब भी जलाया जाता है,
बन भक्त विभीषण शरण गए,
घर बार उसी का हो जाए,
दो चार शहर की बात ही क्या,
संसार उसी का हो जाये।2।

गणिका ने कौन से वेद पढे,
कुब्जा क्या रूप की रानी थी,
जिसमे छल कपट का लेश नहीं,
घनश्याम उसी का हो जाए,
दो चार शहर की बात ही क्या,
संसार उसी का हो जाये।3।

माया के पुजारी सुन लो तुम,
उस प्रेम दीवानी मीरा से,
गर प्रेम हो मीरा सा मन में,
मोहन तेरा भी हो जाए,
दो चार शहर की बात ही क्या,
संसार उसी का हो जाये।4।

प्रभु के चरणों से सच्चा गर,
प्यार किसी को हो जाये,
दो चार शहर की बात ही क्या,
संसार उसी का हो जाये।5।

प्रभु के चरणों से सच्चा गर प्यार किसी को हो जाये भजन में प्रभु श्रीराम के चरणों में जो सच्चा प्रेम और श्रद्धा है, वह व्यक्ति के जीवन को एक नई दिशा देता है। जैसे राम का नाम है प्यारा लगाओ जय जयकारा और राम राज ये आ गया भजन में रामराज्य और प्रभु की महिमा का गुणगान किया जाता है, वैसे ही इस भजन में भी हमें प्रभु के चरणों में बसी शक्ति और प्रेम का अहसास होता है। प्रभु के चरणों से सच्चा प्रेम ही हमें जीवन की सच्ची खुशी और शांति दिला सकता है। जय श्रीराम!

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