श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला

जब प्रभु श्रीराम अपने कोमल कमल समान नयनों से भक्तों पर कृपा दृष्टि डालते हैं, तो संसार के सारे दुख मिट जाते हैं। श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला भजन श्रीराम के शुभ विवाह प्रसंग से जुड़ा है, जिसमें माता सीता अपने वर के रूप में रघुनंदन को चुनकर उन्हें जयमाला पहनाने जा रही हैं। यह भजन उस दिव्य क्षण का वर्णन करता है, जब मिथिला नगरी आनंद और उल्लास से भर उठी थी।

Shri Raghuvar Komal Kamalnayan Ko Pehnao Jaimala

श्री रघुवर कोमल,
कमल नयन को,
पहनाओ जयमाला,
पहनाओ जयमाला,
यह पुण्य महूर्त,
स्वर्णिम अवसर,
फिर नहीं आने वाला,
पहनाओ जयमाला।1।

दो चार चरण चलते चलते,
श्री रघुवर तक ऐसे पहुंचे,
ज्यों छुईमुई के पल्‍लव हो,
सिमटे सिमटे सकुचे सकुचे,
सिमटे सिमटे सकुचे सकुचे,
श्री राम चकित चितवे सीता का,
अदभुत रूप निराला,
पहनाओ जयमाला।2।

श्री रघुवर कोमल,
कमल नयन को,
पहनाओ जयमाला,
पहनाओ जयमाला,
यह पुण्य महूर्त,
स्वर्णिम अवसर,
फिर नहीं आने वाला,
पहनाओ जयमाला।3।

श्रीराम का विवाह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह धर्म, प्रेम और मर्यादा का आदर्श उदाहरण था। यह भजन हमें भक्ति और श्रद्धा से भर देता है और प्रभु के चरणों में समर्पण की प्रेरणा देता है। अगर आपको यह भजन पसंद आया, तो आप मिथिला का कण-कण खिला जमाई राजा राम मिला, राम को देखकर श्री जनक नंदिनी, अवधपुरी में दीप जले हैं, सिया संग मेरे राम चले हैं, और लल्ला की बांटो रे बधाई, अवध में श्रीराम आए हैं जैसे अन्य भजन भी पढ़ सकते हैं। ???? जय श्रीराम! ????

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