जब भक्त के हृदय में भक्ति की प्रबल लहर उठती है, तो उसकी एकमात्र प्रार्थना होती है कि श्रीकृष्ण अपनी दयामयी दृष्टि उस पर बनाए रखें। श्रीकृष्ण की कृपा दृष्टि ही वह संजीवनी है, जो हर संकट को हर लेती है और भक्त को अपने स्नेह से भर देती है। भजन नजरे दया की मेरे श्याम खोलो इसी भक्तिभाव को प्रकट करता है, जहाँ एक भक्त करुणानिधान श्यामसुंदर से अपनी सुध लेने की प्रार्थना करता है। आइए, इस भजन के माध्यम से श्रीकृष्ण की करुणा और प्रेम का अनुभव करें।
Nazre Daya Ki Mere Shyam Kholo
नजरे दया की मेरे श्याम खोलो,
नज़रें दया की मेरे श्याम खोलो,
मेरे हक़ में बाबा,
मेरे हक़ में बाबा,
इक बार बोलो।1।
तेरा ही था मैं तेरा ही रहूँगा,
जो कुछ कहूँगा तुमसे कहूँगा,
दुनिया के ताने अब ना सहूँगा,
जो कुछ कहूँगा तुमसे कहूँगा,
मेरे सब्र को बाबा,
इतना ना तोलो,
मेरे हक़ में बाबा,
इक बार बोलो।2।
मेरे हाल पे बाबा हंसती है दुनिया,
सच मैं कहूँ तो बरसती है दुनिया,
सेवक पे ताने कसती है दुनिया,
सच मैं कहूँ तो बरसती है दुनिया,
कृपा करके तुम तो मेरे,
संग में हो लो,
मेरे हक़ में बाबा,
इक बार बोलो।3।
बिन तेरे अपना नहीं है गुज़ारा,
बड़ी ही उम्मीदों से तुमको पुकारा,
तेरा ये सेवक क्यों फिरे मारा मारा,
बड़ी ही उम्मीदों से तुमको पुकारा,
बिखर मैं रहाँ हूँ,
तनिक तो संजोलो,
मेरे हक़ में बाबा,
इक बार बोलो।4।
हुई भूल कोई उसे तुम भुलादो,
उँगली पकड़ मेरी रस्ता दिखा दो,
‘रोमी’ को चरणों में अपने जगह दो,
उँगली पकड़ मेरी रस्ता दिखा दो,
भक्ति का रस मेरे,
जीवन में घोलों,
मेरे हक़ में बाबा,
इक बार बोलो।5।
नजरे दया की मेरे श्याम खोलो,
नज़रें दया की मेरे श्याम खोलो,
मेरे हक़ में बाबा,
मेरे हक़ में बाबा,
इक बार बोलो।6।
श्रीकृष्ण की एक कृपा दृष्टि ही भक्त के जीवन को संवार सकती है, उसकी हर पीड़ा को हर सकती है। हमें सच्चे मन से बस उन्हें पुकारते रहना है। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे कुछ ना कहूंगा चुप ही रहूँगा, मेरे मन के मंदिर में मूरत है श्याम की, दीनो के नाथ दीनानाथ हमारी सुध लो प्रभु जी और सुना है तेरे दर पे आके मोहन, जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रवाह और गहरा हो जाए। ????????