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श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी

श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी भजन भगवान श्री विष्णु के पवित्र नामों का स्मरण करने का एक सुंदर तरीका है। यह भजन हमें भगवान के दिव्य रूप और उनके असीम प्रेम की अनुभूति कराता है। जब हम इस भजन को गाते हैं, तो हमारा मन और आत्मा भगवान के आशीर्वाद से पूरी तरह से पवित्र और शुद्ध हो जाते हैं। इस भजन में श्री नारायण के नाम का उच्चारण करना हमारी आत्मा को शांति और सुरक्षा प्रदान करता है, और हमें हर प्रकार के संकट से उबारने की शक्ति देता है।

Shreeman Narayan Narayan Hari Hari

श्रीमन नारायण,,, जय जय नारायण,,,
स्वामी नारायण,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी l
जय जय नारायण नारायण हरी हरी l
स्वामी नारायण नारायण हरी हरी l
तूँ है, सब का मोहन, प्यारे प्यारे, हरी हरी l
तुम देव हो सबसे न्यारे न्यारे, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी l
जय जय नारायण नारायण हरी हरी l
स्वामी नारायण नारायण हरी हरी l

देवकी नंदन, हे जग वंदन, ‘मेरे भाग्य विधाता’ l
अपने चरण का, दास बना के, ‘मुक्ति दे सुख दाता’ l
जाऊँ, चरणों पे तेरे, वारी वारी, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

श्याम रंग में, रूप तुम्हारा, ‘दिव्य सुदर्शन धारी’ l
दर्शन से मन, प्रसन्न होता, ‘तुम हो दशा अवतारी’ l
कली, खिल गई मन की, सारी सारी, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

तुम सूरज हो, तुम ही चन्द्रमा, ‘मेरे किशन कन्हईया’ l
नंदन वन में, तुमसा प्यारा, ‘कोई नहीं रास रचईया’ l
तेरे, खेल है सारे, न्यारे न्यारे, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

ब्रह्मा जी ने, श्रिष्टी रची, ‘तुम बन गए पालनहारी’ l
शँकर जी के, भोलेपन की, ‘धुरा संभाली सारी’ l
दुःख, हो जाए हमसे, परे परे, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

पारस समझ के, चरण छुए जो, ‘वो बन जाए सोना’ l
राम तिहारी, छिपा हुआ है, ‘सुंदर रूप सलोना’ l
तूने, सब के संकट, हरे हरे, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

हरी नाम से, हार गए सब, ‘अविजित अत्याचारी’ l
जीत सका न, कोई भी तुमसे, ‘असुर अमंगलकारी’ l
तेरे, नाम से भागे दुःख, सारे सारे, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

मन से, जोड़ लिया तुमको, ‘न रहा कोई मन में उदासी’ l
ना मा मिट गई, काहे सब को, ‘सुख शांति अविनाशी’ l
दिल, तेरे ही नाम से, भरे भरे, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

हमने देखा, तो यही लगा, ‘तेरे चरणों में है,
मेरी ही जगह, मेरी ही जगह’ l
पर मैं, सोचा तो यह जाना, ‘बिन तेरे,
यहाँ पर, कोई न सगा, कोई न सगा’ l
तूँ ही, प्रेम की वर्षा, करी करी, हरी हरी,,,
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी,,,,,,,,,,,,,,,F

श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी भजन में भगवान के दिव्य नामों का जाप करने से जीवन में एक अद्भुत शांति और संतुलन आता है। जब हम इस भजन को हृदय से करते हैं, तो भगवान की कृपा हम पर अनुग्रहित होती है और हमारे जीवन के सभी संकट समाप्त हो जाते हैं। इस भक्ति रस को और गहराई से अनुभव करने के लिए आप श्री हरि की महिमा अपार, गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो, नारायण, नारायण जय गोविंद हरे और संकट हरन श्री विष्णु जी जैसे अन्य भजनों का भी पाठ करें और भगवान विष्णु की कृपा का अनुभव करें। ????????

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