बनारस सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भोलेनाथ की दिव्य लीला का केंद्र है। उसका ही बनारस है, उसका ही ज्ञानवापी भजन शिव जी के अद्वितीय आधिपत्य और उनके पावन धाम काशी की महिमा का गुणगान करता है। जब भी यह भजन किया जाता है, मन स्वतः ही शिवमय हो जाता है और हमें काशी विश्वनाथ की अपार कृपा का अनुभव होता है।
Uska Hi Banaras Hai Uska Hi Gyanvapi Lyrics
है विश्वनाथ बाबा,
सबसे बड़ा प्रतापी,
उसका ही बनारस है,
उसका ही ज्ञानवापी,
हम उसका कर्ज साँस ये,
देकर चुकाएंगे,
मंदिर जहाँ था फिर,
वहीँ मंदिर बनाएँगे,
मंदिर जहाँ था फिर,
वहीँ मंदिर बनाएँगे।1।
हम भोले के भगत है,
फक्क्ड़ मिजाज वाले,
मस्ती में है मगन हम,
दुनिया से निराले,
हम काशी विश्वनाथ से,
वादा निभाएंगे,
मंदिर जहाँ था फिर,
वहीँ मंदिर बनाएँगे।2।
आई भगवे की लहर है,
मंदिर है सजने वाला,
कैलाशी आए काशी,
डमरू है बजने वाला,
बस उसके सामने ही अपना,
सर झुकाएंगे,
मंदिर जहाँ था फिर,
वहीँ मंदिर बनाएँगे।3।
है विश्वनाथ बाबा,
सबसे बड़ा प्रतापी,
उसका ही बनारस है,
उसका ही ज्ञानवापी,
हम उसका कर्ज साँस ये,
देकर चुकाएंगे,
मंदिर जहाँ था फिर,
वहीँ मंदिर बनाएँगे,
मंदिर जहाँ था फिर,
वहीँ मंदिर बनाएँगे।4।
“उसका ही बनारस है, उसका ही ज्ञानवापी” भजन करने से यह एहसास होता है कि शिव जी अनादि और अनंत हैं। काशी उनकी नगरी है और वहां शिव का वास साक्षात है। शिव भक्ति की यह अनुभूति हमें सच्ची शांति और आत्मिक संतोष प्रदान करती है। अगर आपको यह भजन पसंद आया, तो शिव तांडव स्तोत्र, शिव चालीसा, काशी विश्वनाथ स्तोत्र, और महामृत्युंजय मंत्र भी करें। ये सभी भजन हमें शिव जी के और अधिक निकट ले जाते हैं और उनकी कृपा से जोड़ते हैं। ????✨

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile