कावड़ लाऊंगा मैं भोले तेरी कावड़ लाऊंगा

श्रावण मास में शिव भक्तों के लिए सबसे पवित्र कार्य कांवड़ यात्रा होती है, जिसमें श्रद्धालु हरिद्वार, गौमुख या गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।कावड़ लाऊंगा मैं भोले तेरी कावड़ लाऊंगा भजन शिवजी के प्रति इस गहरे प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। जब हम इस भजन का पाठ करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हम भी कांवड़ यात्रा पर निकल चुके हैं और हर हर महादेव के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो रहा है।

Kavad Launga Main Bhole Teri Kavad Launga

कावड़ लाऊंगा,
मैं भोले तेरी कावड लाऊंगा,
आऊंगा मैं भी अबकी बार,
ओ भोले तेरी कावड लाऊंगा।1।

दूर से आया हूं,
मैं भोले बड़ी दूर से आया हूं,
ओ भोले मेरा,
कर दे तू बेड़ा पार,
के मैं बड़ी दूर से आया हूं।2।

नाम जपूं तेरा,
मैं हर पल नाम जपूं तेरा,
के मुझ पर,
है तेरा उपकार,
मैं हर पल नाम जपूं तेरा।3।

शरण में आया हूं,
मैं भोले तेरी शरण में आया हूं,
छोड़के अपना घर और बार,
मैं भोले तेरी,
शरण में आया हूं।4।

दर्श दिखा दे न,
ओ भोले मुझे दर्श दिखा दे न,
करूं मैं विनती बारम्बार,
ओ भोले मुझे,
दर्शन दिखा दे न।5।

बिगड़ी बना दे न,
ओ भोले मेरी बिगड़ी बना दे न,
जपूं मैं नाम तेरा हर बार,
ओ भोले मेरी बिगड़ी बना दे न।6।

कावड़ लाऊंगा,
मैं भोले तेरी कावड लाऊंगा,
आऊंगा मैं भी अबकी बार,
ओ भोले तेरी कावड लाऊंगा।7।

भोलेनाथ की भक्ति में किया गया हर कार्य जीवन को पवित्र बना देता है, और कांवड़ यात्रा तो शिव प्रेम का सबसे उत्तम उदाहरण है। “कावड़ लाऊंगा मैं भोले तेरी कावड़ लाऊंगा” भजन की तरह “आए है सावन में शंकर माँ गौरा जी के साथ”, “महाकाल की कृपा से सब काम हो रहा है”, “भोलेनाथ ने पकड़ा हाथ नहीं तो मैं बह जाता” और “शिव का जपले नाम क्या लागे तेरा” जैसे भजन भी हमें शिवजी की अपार कृपा का अनुभव कराते हैं। आइए, इन भजनों का पाठ करें और शिव भक्ति में डूब जाएं। ????????

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