जय जय हरि हरि गौरी शंकर ईश्वर दीनदयाला है

गौरीशंकर की महिमा अपार है, वे करुणा, दया और कल्याण के प्रतीक हैं। “जय जय हरि हरि गौरी शंकर ईश्वर दीनदयाला है” भजन हमें शिव-पार्वती की असीम कृपा और भक्तवत्सलता का अनुभव कराता है। जब हम इस भजन का पाठ करते हैं, तो ऐसा लगता है मानो स्वयं महादेव और माता पार्वती हमें आशीर्वाद दे रहे हों, हमारी हर पीड़ा हर रहे हों और हमें प्रेम व शांति के मार्ग पर ले जा रहे हों।

Jai Jai Hari Hari Gauri Shankar Eshvar Deendayala

जय जय हरि हरि गौरी शंकर,
ईश्वर दीनदयाला है,
राम नाम में समय बिताना,
सच्चा धर्म हमारा है।1।

कैलाशी काशी के वासी,
भोला डमरू वाला है,
जटा जुट में गंग विराजे,
अर्द्ध चन्द्रमा न्यारा है,
जय जय हरिहर गौरी शंकर,
ईश्वर दीनदयाला है।2।

गले बीच लिपटे है बिषधर,
कानन कुण्डल वाला है,
नाव पड़ी मझधार बीच में,
दिखत नहीं किनारा है,
जय जय हरिहर गौरी शंकर,
ईश्वर दीनदयाला है।3।

आँख खोलकर देख रे मनवा,
जग में कौन हमारा है,
सुबह शाम दिन रात रटे तो,
हो कल्याण हमारा है,
जय जय हरिहर गौरी शंकर,
ईश्वर दीनदयाला है।4।

अलख निरंजन भव दुःख भंजन,
भक्तो का प्रतिपाला है,
जो ध्यावे इच्छा फल पावे,
पल में करत निहाला है,
जय जय हरिहर गौरी शंकर,
ईश्वर दीनदयाला है।5।

जय जय हरि हरि गौरी शंकर,
ईश्वर दीनदयाला है,
राम नाम में समय बिताना,
सच्चा धर्म हमारा है।6।

गौरीशंकर की भक्ति से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है, क्योंकि वे दयालु और कृपालु हैं। “जय जय हरि हरि गौरी शंकर ईश्वर दीनदयाला है” भजन की तरह “शंकर भोले भंडारी तुम जन जन के हितकारी”, “महाकाल की कृपा से सब काम हो रहा है”, “भोलेनाथ ने पकड़ा हाथ नहीं तो मैं बह जाता”, और “मांगना है तो भोले से मांगो” जैसे भजन भी हमें शिव-पार्वती की कृपा का अहसास कराते हैं। आइए, इन पावन भजनों का पाठ करें और महादेव-माता पार्वती की भक्ति में लीन हों। ????????

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